जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : एमबीपीजी डिग्री कॉलेज के पांच शिक्षक और एक शिक्षिका पर एक दूसरे के खिलाफ आरोप हैं। शिक्षिका ने मानसिक उत्पीडऩ व अश्लीलता का आरोप लगाया है तो प्राचार्य सहित पांच शिक्षकों ने सरकारी कार्य में बाधा व जाति सूचक शब्दों के प्रयोग की बात कही है। जिसमें दोनों पक्षों की ओर से कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। वहीं अब इस मामले की जांच राज्य महिला आयोग करेगा।

एमबीपीजी महाविद्यालय के प्राचार्य डा. बीआर पंत ने पुलिस को दी तहरीर में कहा है कि 19 दिसंबर 2020 को अपराह्न तीन बजे कालेज की शिक्षिका ने सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का प्रयास किया। प्राचार्य के साथ गाली-गलौज करते हुए दिव्यांगता पर टिप्पणी की। वहीं शिक्षिका का आरोप है कि प्राचार्य सहित पांच शिक्षकों ने उनका मानसिक उत्पीडऩ व अश्लीलता करने का प्रयास किया। जिसमें बीते नौ माह से कई स्तर पर जांच का कार्य किया जा रहा है।

शिक्षिका का आरोप है कि वह पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने के लिए बीते एक माह से कोशिश कर रही थी, लेकिन पुलिस मुकदमा नहीं दर्ज कर रही थी। लंबे समय तक प्रयास के बाद वह 19 सितंबर को डीआइजी नीलेश आनंद भरणे व एसएसपी प्रीति प्रियदर्शिनी से मिलकर अपनी बात रखी। जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की है। पुलिस विभाग की ओर से सीओ शांतनु परासर को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। जबकि राज्य महिला आयोग ने पत्र लिखकर मामले की जांच शुरू किए जाने की बात कही है। जिसमें प्राचार्य सहित पांच शिक्षक व शिक्षिका के बयान दर्ज किए जाएंगे।

मजिस्ट्रेट व राष्ट्रीय महिला आयोग ने की जांच

मानसिक उत्पीडऩ, अश्लीलता, सरकारी कार्य में बाधा, ब्लैकमेल करने के आरोप वाले इस केस की जांच राष्ट्रीय महिला आयोग पहले ही कर चुका है। जबकि डीएम के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह भी जांच कर चुकी हैं। प्राचार्य का कहना है कि वह जांच के लिए हमेशा तैयार हैं। सच्चाई सामने आनी चाहिए। जबकि महिला शिक्षिका का कहना है कि लंबे प्रयास के बाद मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

Edited By: Skand Shukla