नैनीताल (जेएनएन): हिमालय देश के पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है। जलस्रोत का सबसे बड़ा भंडार है। बीते एक दशक के बीच उच्च हिमालय में हिमपात का चक्र शंकाएं पैदा कर रहा था। इस बार उच्च हिमालय में अगस्त के अंत से हो रहा हिमपात शुभ संकेत दे रहा है। इसी के परिणामस्वरू प शरद ऋतु के सुहावने मौसम में ठंड की गुदगुदी होने लगी है।

अक्टूबर मध्य हिमालय में सबसे सुहाने मौसम का समयकाल होता है। जब न तो ज्यादा गर्मी रहती है और न ही ज्यादा ठंड। दस वर्ष बाद एक बार फिर अक्टूबर में ही नवंबर के अंत जैसी ठंड पड़ रही है। लोगों ने गर्म कपड़े निकाल लिए हैं। इसका कारण वर्षा नहीं अपितु उच्च हिमालयी चोटियों पर मानसून काल के बाद चार बार का हिमपात बताया जा रहा है। हिमपात के चलते बहने वाली ठंडी हवाएं ठंड में इजाफा कर रही हैं। उच्च हिमालय में लगातार हिमपात से बन रही नमी से उच्च हिमालय में अच्छे हिमपात की संभावना बन रही है।

मानसून भी अधिक रहा सक्रिय

मानसून काल में भी इस बार उच्च हिमालय और उससे लगे क्षेत्रों में मानसून अन्य स्थानों से अधिक सक्रिय रहा। धारचूला और मुनस्यारी तहसील क्षेत्रों में भारी वर्षा हुई। पूरे मानसून काल में बारिश होती रही। जिसके चलते यहां पर बनी नमी अपना असर दिखा रही है।

मानसून थमते ही ऊंची चोटियों में हुआ हिमपात

मानसून थमते ही ऊंची चोटियों में हिमपात होने लगा था। अभी तक चार बार हिमपात हो चुका है। मुनस्यारी निवासी मौसम के जानकार लक्ष्मण राम बताते हैं कि 2008-09 में वर्तमान जैसा ही मौसम रहा था। तब सितंबर से ही ऊंची चोटियों पर हिमपात होने लगा था। शीतकाल में समय पर मुनस्यारी में भी हिमपात हो गया था। इस बार जोहार घाटी के मिलम और पांछू के मध्य की एक चोटी पर इस मौसम का हिमपात हो चुका है। मुनस्यारी के सामने हंसालिंग में अक्टूबर में ही हिमपात हो चुका  है।

13 डिग्री तक पहुंचा पारा

पहली बार अक्टूबर में पारा 13 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा है। पिथौरागढ़ में 11 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 13 डिग्री और न्यूनतम तापमान 8 डिग्री रहा। बीते वर्षों तक यह तापमान अधिकतम 20 डिग्री के आसपास और न्यूनतम 13 से 14 डिग्री तक रहता था।

अच्‍छे हिमपात की संभावना

डॉ. धीरेंद्र जोशी, पर्यावरणविद् ने बताया कि ऊंची चोटियों पर मानसून थमने के बाद हो रहा हिमपात शुभ संकेत है। यह पर्यावरण के लिए अच्छे संकेत हैं। हिमपात के चलते बनने वाली नमी से आगे भी अच्छे हिमपात की संभावना है। बीते कुछ वर्षों के बीच उच्च हिमालय में समय से बर्फबारी नहीं हो रही थी। जनवरी यहां तक कि फरवरी तक में हिमपात हो रहा था। जिससे चोटियां काली भी नजर आने लगी थी। जबकि इस बार अक्टूबर में ही यह बर्फ की सफेद चादर ओढ़े हुई हैं।

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Posted By: Skand Shukla