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रुद्रपुर, जेएनएन : सिख फॉर जस्टिस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके तहत डीएम कार्यालय और एसएसपी कार्यालय में नोटिस चस्पा कर दिया गया है। जिसमें कहा गया है कि संगठन से जुड़े पदाधिकारी अपनी बात रख सकते हैं। 

तराई क्षेत्र में खालिस्तान समर्थकों की भारी संख्या रही है। 90 के दशक में खालिस्तान से जुड़ी आतंकी गतिविधियां यहां रही। तराई से खालिस्तान का पतन हो गया, लेकिन धीरे धीरे अब खालिस्तान और भिंडरवाला के समर्थन में सोशल मीडिया में काफी सक्रियता दिखने लगी। पिछले एक साल में पुलिस ऐसे आधा दर्जन से अधिक संदिग्ध मामले पकड़ चुकी है। इसमें सबसे पहले पुलिस और खुफिया विभाग ने खटीमा में खालिस्तान समर्थन में चल रहा वाट्सएप ग्रुप का खुलासा करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद बाजपुर, रुद्रपुर, सितारगंज थाना क्षेत्र के साथ ही बाजपुर, गदरपुर के बाद दिनेशपुर में सोशल मीडिया में खालिस्तान समर्थन में पोस्ट टैग करने वाले युवक को चिह्नित कर उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। इधर, जुलाई में भारत सरकार ने खालिस्तान समर्थक समूह सिख फॉर जस्टिस संगठन पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद अब उत्तराखंड में भी सिख फॉर जस्टिस पर प्रतिबंध लगने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए डीएम और एसएसपी कार्यालय में नोटिस चस्पा किया गया है। एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने बताया कि संगठन को भारत सरकार ने बैन कर दिया था। प्रक्रिया के तहत नोटिस चस्पा किए गए हैं। 

कौन-कौन लोग इस संगठन में हैं शामिल

ये संगठन अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया समेत कई और देशों में अपनी गतिविधियां चला रहा है। इस संगठन का मुख्य मकसद है पंजाब के माहौल को अशांत करना और खत्म हो चुके खालिस्तान मूवमेंट को दोबारा जिंदा करना है। भारत की खुफिया एजेंसियों के मुताबिक इस संगठन के काम में सीधे तौर पर पाकिस्तान मदद कर रहा है। 

Posted By: Skand Shukla

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