दीप चंद्र बेलवाल, हल्द्वानी : 'हम खैरना से पैदल ही गरमपानी पहुंच गए थे। गरमपानी के पास पहाड़ से पत्थर मौत बनकर गिर रहे थे। नीचे सड़क पर फंसे 550 लोगों का धैर्य जवाब दे रहा था। हमें पत्थर रूपी मौत से बचकर सभी लोगों की जान बचानी थी। डेढ़ घंटे रेस्क्यू चला और सभी सुरक्षित निकाल लिए गए। यह मंजर तो एक बानगी है। पूरे कुमाऊं में इसी तरह का खौफनाक मंजर तीन दिन देखने को मिला।'

आपदा की यह दास्तान कुमाऊं के एसडीआरएफ प्रभारी गजेंद्र सिंह परवाल ने सुनाई। नैनीताल व पिथौरागढ़ जिले में रेस्क्यू करने के बाद वह शनिवार को रुद्रपुर लौटे। उन्होंने बताया कि तीन दिन की बारिश ने तराई से पहाड़ तक आफत बरसाई। गरमपानी में लोगों के फंसने की सूचना मिलते ही वह 18 अक्टूबर की सुबह रुद्रपुर से निकल पड़े थे। खैरना से रोड बंद होने पर वह पांच किमी पैदल गए तो रास्ते में पहाड़ दरक रहे थे। ऊपर से पत्थर मौत बनकर गिर रहे थे। नीचे 550 लोग जिंदगी की दुहाई मांग रहे थे।

पत्थरों के शोर में आवाज सुनाई नहीं दे रही थी। गिरते पत्थरों से बचकर टीम ने पहाड़ी पार की और फंसे सभी लोगों को धैर्य दिलाया। इसके बाद सभी को सुरक्षित रेस्क्यू कर एक रिसार्ट में पहुंचाया गया। इसके बाद टीम खैरना से 22 किलोमीटर दूर सकुना गांव पहुंची। जहां मलबे में दबे पांच लोगों को बाहर निकाला गया। अल्मोड़ा की एसडीआरएफ ने मलबे में दबी एक बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जबकि एक की पहले ही मौत हो गई थी। हर तरफ चीखपुकार थी। हमने सभी कर्मचारियों को बचाव कार्य में लगा दिया था। बारिश कम हुई तो जिंदगी बचाने की उम्मीद बढ़ गई।

165 एसडीआरएफ कर्मी बने देवदूत

कुमाऊं में एसडीआरएफ के 165 कर्मी देवदूत बनकर सामने आए। 18 अक्टूबर को रुद्रपुर में जलभराव होने पर 95 लोगों को रेस्क्यू किया गया। 19 को एमनिटी स्कूल में फंसे 49 बच्चों को सुरक्षित निकाला गया। 21 अक्टूबर को कफनी ग्लेशियर में फंसे 19 लोगों व 600 बकरियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। पूरे कुमाऊं में सैंकड़ों लोगों को रेस्क्यू किया। यह सिलसिला जारी है। मृतकों के शव निकालकर स्वजनों को सौंपे गए।

जायजा लेने पहुंचे आइजी, सेनानायक

एसडीआरएफ टीम के बचाव कार्य व आपदा से हुई क्षति का जायजा लेने के लिए एसडीआरएफ के आइजी पुष्पक ज्योति, सेनानायक नवनीत सिंह व सहायक सेनानायक कमल सिंह पंवार भी पहुंचे। उन्होंने कुमाऊं प्रभारी से सभी पहलुओं की जानकारी ली और बताया कि जरूरत पड़ी तो देहरादून व हरिद्वार से एसडीआरएफ कर्मी भेजे जाएंगे।

Edited By: Skand Shukla