नैनीताल, जेएनएन : हाई कोर्ट ने समाज कल्याण विभाग के छात्रवृत्ति घोटाला मामले में सुनवाई करते हुए एक आरोपित अनुराग शंखधर को एक सप्ताह के भीतर जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार की घोटाले की जांच के लिए आइपीएस अधिकारी के नेतृत्व में एसआइटी गठित करने के संशोधित प्रार्थना पत्र पर तीन सप्ताह में शपथ पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ में देहरादून के राज्य आंदोलनकारी रवींद्र जुगरान की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।

इस दौरान एसआइटी के अध्यक्ष टीसी मंजू नाथ द्वारा शपथ पत्र दाखिल किया गया, जिसमें कहा गया था कि आरोपी अनुराग शंखधर जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। राज्य सरकार द्वारा संशोधित प्रार्थना पत्र में कहा है कि यह मामला पूरे प्रदेश से जुड़ा है। लिहाजा सरकार इस घोटाले की जांच आइपीएस से कराना चाहती है। इसी मामले में अनुराग द्वारा गिरफ्तारी पर रोक को लेकर अर्जी दाखिल की थी। खंडपीठ ने अर्जी खारिज कर एक सप्ताह में जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए हैं। यहां बता दें कि जनहित याचिका में कहा गया था कि 2003 से अब तक विभाग द्वारा एससी-एसटी छात्रों की छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं किया, जिससे साफ है कि इसमें करोड़ों का घोटाला हुआ है। कहा कि दो साल पहले मुख्यमंत्री द्वारा एसआइटी गठित करते हुए तीन माह के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश दिए थे मगर इसके बाद जांच आगे नहीं बढ़ी। याचिका मेें घोटाले की सीबीआइ जांच की मांग भी की थी।

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Posted By: Skand Shukla

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