जागरण संवाददाता, नैनीताल : बीडी पाडे अस्पताल में हड्डी रोगियों से मामूली चोट लगने पर भी बाजार से डेढ़ हजार का फाइबर प्लास्टर मंगाया जा रहा है। आरोप है कि अस्पताल कर्मियों द्वारा फाइबर प्लास्टर तीमारदारों को जबरन खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उसका बिल भी नहीं दिया जा रहा है।

दरअसल शनिवार को अयारपाटा निवासी हंसी गडि़या पत्नी बलवंत सिंह पैर में मोच आने की वजह से बीडी पाडे अस्पताल पहुंची तो अस्पताल के संविदा कर्मी ने प्लास्टर चढ़ाने की बात कही। फाइबर प्लास्टर व प्लास्टर आफ पेरिस का विकल्प बताया गया। फाइबर प्लास्टर की कीमत डेढ़ हजार बताई गई, जिसे तीमारदार उमेश गड़िया ने दे दिया। उमेश ने जब इसका बिल मांगा तो अस्पताल कर्मी ने देने से मना कर दिया। उमेश के अनुसार, अस्पताल कर्मी ने अस्पताल के अंदर कमरे से फाइबर प्लास्टर उपलब्ध कराया। इसी बीच अन्य मरीज व तीमारदार भी पहुंच गए और वे भी मामूली चोट पर डेढ़ हजार का फाइबर प्लास्टर लगाने का आरोप लगाने लगे। हंगामा बढ़ा तो प्रभारी पीएमएस डॉ. आरके वर्मा पहुंच गए और उन्होंने संविदा कर्मी को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही दोबारा यह हरकत करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। डॉ. वर्मा के अनुसार अस्पताल में सिर्फ प्लास्टर ऑफ पेरिस की सप्लाई है, यदि कोई रोगी फाइबर प्लास्टर लगाता है तो उसे बाजार से खुद लाना होगा। उन्होंने कहा कि तीमारदार को संविदा कर्मी से फाइबर प्लास्टर मंगाने के बजाय खुद जाना चाहिए था। वर्जन

मैं ऑपरेशन थियेटर में था। हंगामे की शोर सुनकर बाहर आया। संविदा कर्मी ने गलती मान ली। उसे फटकार लगाई गई है। उसने भविष्य में ऐसा न करने की भी बात कही है। मामूली मोच पर प्लास्टर ऑफ पेरिस अस्पताल में उपलब्ध होने के बाद भी बाजार से जबरन फाइबर प्लास्टर मंगाने का आरोप गलत व निराधार है।

-डॉ. संजीव प्रकाश, ऑर्थो सर्जन

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