सौहार्द की खूबसूरत मिसाल, रामनगर में मुस्लिम परिवार चार पीढ़ियों से बना रहा रावण-मेघनाद और कुंभकरण के पुतले
रामनगर का एक मुस्लिम परिवार चार पीढ़ियों से रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले बनाने की परंपरा निभा रहा है, जो सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है।

रामनगर में पायतेवाली रामलीला की ओर से बनाए जा रहे रावण, कुंभकरण के पुतले। जागरण

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जागरण संवाददाता, रामनगर। मजहब, त्योहार और कला की कोई दीवार नहीं होती है। इस बात की सबसे खूबसूरत मिसाल रामनगर का एक मुस्लिम परिवार पेश कर रहा है। चार पीढ़ियों से रावण, मेघनाद व कुंभकरण के पुतले बनाकर अपनी परंपरा निभा रहा है। पहले परदादा, फिर दादा इसके बाद पिता और अब बेटे ने यह हुनर सीखा है।
रामनगर के मोहल्ला बंबाघेर निवासी गुलजार ने बताया कि उनके परदादा अल्लहा बकश और दादा अब्दुल सत्तार पुतले तैयार करते थे। इसके बाद ताऊ असलम और पिता तसलीम ने इस कार्य को आगे बढ़ाया।
ढाई साल पहले पिता की मौत के बाद खुद इस परंपरा को निभा रहे हैं। गुलजार ने बताया कि पायतेवाली रामलीला के अलावा पीरूमदारा, लामाचौड़ व जसपुर क्षेत्र में भी दहन के लिए पुतले बनाकर भेजे जाते हैं। पुतले बनाने का काम रामलीला से पहले शुरू हो जाता है। स्वार, हापुड़ व मुरादाबाद से श्रमिक बुलाए जाते हैं। बांस, अबरी, अखबार व मैदा से पुतला तैयार किया जाता है।
पायतेवाली रामलीला के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने बताया कि लगभग 125 वर्ष से पायतेवाली रामलीला ही पुतला दहन करती आ रही है। यह परिवार लंबे समय से रामलीला के लिए पुतला बनाते आ रहा है, जो बाहर भी भेजे जाते हैं।
