रामनगर बस टर्मिनल परियोजना, वन भूमि की मंजूरी में देरी से निर्माण अटका
रामनगर बस टर्मिनल परियोजना वन भूमि की मंजूरी न मिलने के कारण अटकी हुई है। 0.126 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि के ...और पढ़ें

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जासं, रामनगर। रोडवेज डिपो में बन रहे बस टर्मिनल के लिए अतिरिक्त वन भूमि नहीं मिल पाई है। राज्य सरकार के माध्यम से भेजी गई भूमि हस्तांतरण की अनुमति का प्रस्ताव अब पर्यावरण मंत्रालय (भारत सरकार) में अटका हुआ है। अतिरिक्त भूमि मिलने से निर्माण कार्य को और गति मिलती।
रामनगर में सरकार की ओर से वन विभाग की लीज वाली लगभग तीन एकड़ भूमि पर यात्री सुविधाओं और विभागीय संसाधनों को बढ़ावा देने के लिए रोडवेज डिपो को बस टर्मिनल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका कार्य वर्ष 2024-25 में पूरा होना था, लेकिन डिजाइन में बदलाव और यात्रियों के लिए नई सुविधाएं जोड़ने के कारण बजट एवं कार्य पूरा होने की समयसीमा को मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया था।
0.126 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता
योजना में नई सुविधाएं जोड़ने और बढ़ती लागत को देखते हुए कार्यदायी संस्था ने 50.14 करोड़ रुपये का संशोधित प्रस्ताव भेजा था। इसमें से 28.14 करोड़ रुपये पहले ही मिल चुके हैं। अप्रैल दूसरे सप्ताह में शासन की ओर से शेष 21.57 करोड़ रुपये और आवंटित कर दिए गए। तब से निर्माण कार्य लगातार चल रहा है।
आधुनिक बस टर्मिनल के निर्माण के लिए 0.126 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता पड़ी। इसी क्रम में रोडवेज अधिकारियों की ओर से वन विभाग को प्रस्ताव भेजा गया। राज्य सरकार के माध्यम से यह प्रस्ताव अनुमति के लिए भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को भेजा गया जिसे भेजे हुए लगभग एक माह हो चुका है। यदि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में समय लगेगा तो यह कार्य तय समयसीमा तक पूरा होना मुश्किल है।
उत्तराखंड सरकार में जमीन हस्तांतरण का प्रस्ताव स्वीकृत होकर भारत सरकार के स्तर पर लंबित है। बस टर्मिनल के लिए दूसरा गेट बनाया जाना है। इसलिए और जमीन की आवश्यकता है। प्रस्ताव भेजने से पूर्व जमीन हस्तांतरण को लेकर वनाधिकारियों के साथ बैठक भी हो चुकी है। बस टर्मिनल का कार्य 60 प्रतिशत पूरा हो चुका है।
- नवीन आर्य, एआरएम रोडवेज डिपो रामनगर
एक माह पहले प्रस्ताव राज्य सरकार से भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को भेजा चुका है। भारत सरकार से जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया जल्द पूरी कराने के लिए मुख्यमंत्री से देहरादून में वार्ता की जाएगी।
- दीवान सिंह बिष्ट, विधायक रामनगर
