राजेश वर्मा, हल्द्वानी : Ramleela 2022 : देशभर में इस समय रामलीला की धूम है। नवरात्रि शुरू होते ही इसका भी आयोजन शुरू हो जाता है। उत्तराखंड में भी इस समय हर तरफ रामलीला की ही चर्चा है। हल्द्वानी में होने वाली कुमाऊं की एकमात्र दिन की रामलीला तो खास है ही, मगर कुमाऊं में ही एक और रामलीला है, जिसकी चर्चा विदेशों तक हो रही है। इस रामलीला का आयोजन होता है हल्द्वानी से करीब 27 किमी दूर कुमाऊं के सबसे बड़े जिले ऊधम सिंह नगर के पंतनगर में।

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पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में होता है आयोजन

पंतनगर में एशिया का पहला कृषि विश्वविद्यालय है गोबिंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय। इसी विश्वविद्यालय के परिसर 44 वर्षों से इस अद्भत रामलीला का अायोजन किया जा रहा है (Ramleela in GB pant agricultural university)। यूं तो यह विश्वविद्यालय अपनी शिक्षा और शोध अध्ययनों के लिए विख्यात है, मगर इस त्योहारी सीजन में यहां हो रही रामलीला के कारण भी यह विश्वविद्यालय विदेशों तक चर्चा बटोर रही है। यहां पढ़ने वाले विदेशी छात्र-छात्राएं इस आयोजन की चर्चा और आकर्षण अपने देश में भी फैला रहे है। अपने फोन से वीडियो कॉलिंग के जरिए या फिर वीडियो रिकॉर्ड कर इसे दुनियाभर में पहुंचा रहे हैं।

1979 से हो रही रामलीला

इस रामलीला का आयोजन पंतनगर की संस्था उत्तरांचल संगम कर रही है। संस्था के अध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह माखोड़ी ने बताया कि इस संस्था का गठन 1979 में किया गया था। तभी से यह संस्था उत्तराखंडी संस्कृति के साथ हिंदू धर्म का प्रसार कर रही है। उनकी संस्था विश्वविद्यालय परिसर में ही सिर्फ रामलीला ही नहीं, जन्माष्टमी, उत्तरायणी मेला, होली मिलन आदि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयाेजन कर रही है। इसमें विश्वविद्यालय के स्टाफ के साथ छात्र-छात्राओं का भी सहयोग मिलता है।

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दशहरे में जुटेगी 20 हजार की भीड़

डॉ. विक्रम सिंह माखोड़ी ने बताया कि उनकी संस्था के कार्यकारिणी सदस्यों की संख्या 15 है। मगर इससे इतर भी 150 से ज्यादा सक्रिय सदस्य हैं, जो संस्था को आगे बढ़ा रहे हैं। इनकी मदद से दो महीने पहले ही रामलीला आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई थीं और अब इसका सफल आयोजन हो रहा है। स्थानीय कलाकार पूरी तन्मयता से भगवान राम के चरित्र का प्रदर्शन कर रहे हैं। जनता भी इसका मनोरंजन उठा रही है। उन्होंने बताया कि रामलीला देखने के लिए मैदान के बाहर तक भीड़ जुट रही है। इस भीड़ से ही इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि आयोजन कितना सफल हो रहा है। डॉ. माखोड़ी ने बताया कि 5 अक्टूबर को दशहरे पर रावण दहन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें करीब 20 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।

Edited By: Rajesh Verma

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