जागरण संवाददाता, धारचूला (पिथौरागढ़) : वर्ष 2020 कोरोना महामारी की भेंट चढ़े भारत-चीन सीमांत स्थलीय व्यापार को इस वर्ष पूर्व की भांति संचालित किए जाने की मांग उठने लगी है। भारत चीन व्यापार समिति ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर वर्ष 2021 में भारत-चीन व्यापार संचालित कराने की मांग की है।

भारत-चीन व्यापार समिति के उपाध्यक्ष दिनेश गुंज्याल ने कहा है कि भारत-चीन व्यापार के लिए भारतीय मंडी गुंजी और तिब्बती चीन की मंडी तकलाकोट के मध्य व्यापार होता है। यह व्यापार स्थानीय व्यापारियों और युवाओं के रोजगार का प्रमुख साधन है। बीते वर्ष व्यापार कोरोना महामारी की भेंट चढ़ चुका है। व्यापारी इस व्यापार के लिए बैंक से ऋण लेकर सामान खरीदते हैं। बीते वर्ष व्यापार नहीं होने से भारतीय व्यापारियों का लाखों का सामान मंडियों में डंप पड़ा है।

(तिब्‍बत की मंडी )

उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ एक करोड़ का सामान बर्बाद हो रहा है वहीं भारतीय व्यापारियों के मंडियों में दुकान का किराया प्रतिमाह पांच हजार की दर से साठ हजार रुपये तक हो चुका है। यह भुगतान व्यापारियों पर अवशेष है। ज्ञापन में प्रधानमंत्री से कहा गया है कि व्यापारियों सहित क्षेत्र की आम जनता पूर्व की भांति भारत-चीन व्यापार संचालित करना चाहती है। प्रधानमंत्री से इस वर्ष भारत-चीन व्यापार संचालित किए जाने की मांग की है।

एक जून से होता है भारत-चीन व्यापार

प्रतिवर्ष एक जून से भारत-चीन व्यापार की आधिकारिक घोषणा होती है। व्यापार 31 अक्टूबर तक चलता है। व्यापार के लिए जनवरी माह से तैयारियां होने लगती हैं। कैलास मानसरोवर यात्रा की बैठक के साथ ही इसकी बैठक भी होती है। इस वर्ष अभी तक कोई बैठक नहीं हुई है। व्यापार में भाग लेने वाले व्यापारियों और सहायकों के लिए ट्रेड परमिट विदेश मंत्रालय भारत सरकार जारी करती है। एक जून के बाद परमिट जारी होते हैं।

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