संस, रामनगर : एआइएमए ने सरकार द्वारा प्रस्तावित सीइए एक्ट के खिलाफ 15 सितंबर से बेमियादी हड़ताल पर जाने का एलान कर दिया है।

आइएम के बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में उत्तराखंड सरकार द्वारा लागू किए जा रहे इस एक्ट को जन विरोधी करार दिया। डॉ. बृजेश अग्रवाल की अध्यक्षता एवं डॉ. केसी जोशी के संचालन में संपन्न बैठक में वक्ताओं ने कहा कि वह सीईए एक्ट में अपना पंजीकरण नहीं कराएंगे। इससे इलाज आठ से दस गुना महंगा हो जाएगा। यह एक्ट जनविरोधी अव्यवहारिक एवं राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के विपरीत है।

माग की गयी कि क्लिनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 से 50 बैड से कम से अस्पताल, क्लीनिक, डे-केयर सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर एवं पैथोलोजी लैबों को छूट दी जाए। पचास बैड से उपर के अस्पतालों को हरियाणा सरकार के अनुसार रियायत दी जाए। वक्ताओं ने कहा कि उपचार दर केवल चिकित्सकों व संस्थानों द्वारा ही तय की जा सकती है, क्योंकि वह मर्ज के प्रकार व मरीज की स्थिति के आधार पर निर्णय लेने के लिए सक्षम है। सभी के लिए उपचार का तरीका व दर एक होना सम्भव नहीं है। चिकित्सकों का यह भी कहना था कि केवल जेनेरिक दवाएं लिखना डॉक्टर के हाथ में नहीं है। यह केवल सरकार के हाथ में है। सरकार चाहे तो बड़ी ब्राडेड दवाओं की कंपनियों के लाइसेंस रद कर सकती है। एक राय बनी कि यदि सरकार ने चौदह सितंबर तक उनकी मागे स्वीकार नहीं की तो पंद्रह सितंबर से अनिश्चितकाल के लिए मजबूरीवश सभी निजी अस्पताल आदि स्वत: बन्द कर दिए जाएंगे। इस दौरान डॉ. प्रामोद कुमार मेहरोत्रा, डॉ. केसी जोशी, डॉ. विपिन कुमार मेहरोत्रा मौजूद रहे।

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