जागरण संवाददाता, हल्द्वानी: पुलिस महकमे के लिए रहस्य बन चुकी शहर के चर्चित पूनम पांडे हत्याकांड की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस अब बाहरी राज्यों के चक्कर नहीं लगाएगी। उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान तक घूम चुकी टीमों को वापस हल्द्वानी बुला लिया गया है। सूत्रों की मानें तो अब जांच टीम का पूरा फोकस ट्रांसपोर्टर लक्ष्मी दत्त पांडे के परिवार से जुड़े करीबी लोगों पर है। उनकी कुंडली खंगालने के साथ सर्विलांस का सहारा भी लिया जा रहा है।

27 अगस्त को गोरापड़ाव में हुए पूनम पांडे हत्याकांड की एकमात्र चश्मदीद पूनम की बेटी अर्शी से भी पुलिस को अब तक कोई मदद नहीं मिली है। उसके हर बयान ने उलझनें बढ़ाई हैं। शुरू में पुलिस को लगा कि किसी पेशेवर गिरोह ने इस वारदात को अंजाम दिया है। लिहाजा एसआइटी में शामिल टीमों ने गिरोह की तलाश करनी शुरू की। यहां तक कि किसी भी जगह इस तरह की घटना को अंजाम देने वाले गैंग के पकड़े जाने पर पुलिस पूछताछ को वहां रवाना हो जाती, लेकिन डेढ़ माह तक चली इस भागमभाग के बावजूद कुछ हाथ नहीं लगा। जितने भी संदिग्ध इस घटना में उठाए गए, सबका बयान तस्दीक करने के बावजूद हत्यारों तक पहुंचने की लाइन नहीं मिली। लिहाजा बाहर खाक छान रही सभी टीमों को हल्द्वानी बुला लिया गया है। अब इन टीमों को परिवार के करीबी समझे जाने वाले लोगों की अलग-अलग लिस्ट सौंपी गई है। हर टीम इन नामों की घटना से लेकर सात दिन के अंदर की लोकेशन ट्रेस करने में जुटी है। संदेह के आधार पर इन करीबियों को पुलिस पूछताछ के लिए बुलाएगी। हालांकि किसी अपने से हत्या का राज उगालवाना बड़ी चुनौती है। लिहाजा पुलिस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। घर तक दस्तक वाले खास हैं राडार पर

करीबियों के जरिये हत्याकांड की परतें उधेड़ना इतना आसान नहीं है। पुलिस पहले उन लोगों को चिह्नित कर रही है, जो कई बार घर पर दस्तक दे चुके हैं। उसके बाद अन्य का नंबर आएगा। सूत्रों की मानें तो नगला का एक व्यक्ति संदिग्ध सूची में शामिल है।

Posted By: Jagran

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