जागरण संवाददाता, नैनीताल : हाई कोर्ट ने टिहरी झील में वाटर स्पो‌र्ट्स को तय नियमों के अनुसार हरी झंडी दे दी है। साथ ही ऋषिकेश में गंगा नदी में रीवर रॉफ्टिंग की भी अनुमति दे दी है। कोर्ट के इस फैसले से सरकार के साथ ही रीवर रॉफ्टिंग बंद होने से बेरोजगार हुए लोगों को बड़ी राहत मिली है।

दरअसल, हाई कोर्ट ने राज्य में साहसिक खेलों की नीति न होने से इस पर रोक लगा दी थी। इस वजह से टिहरी झील में सेना की ट्रेनिंग भी बंद हो गई थी। इधर, राज्य सरकार, भारतीय सेना तथा टिहरी झील में बोट संचालकों की संस्था गंगा भागीरथी बोट समिति टिहरी ने कोर्ट में अलग-अलग प्रार्थना पत्र दाखिल किए थे। आर्मी की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि टिहरी झील में सार्क देशों की ट्रेनिंग होनी है। अन्य ट्रेनिंग भी इस आदेश की वजह से रुक गई हैं। बोट संचालकों के अधिवक्ता संदीप कोठारी ने अदालत को बताया कि पहली सितंबर को वाटर स्पो‌र्ट्स का गजट जारी किया गया था। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए पूर्व के आदेश में संशोधन कर दिया। कोर्ट ने सरकार को यह भी आदेश दिया है कि वह आर्मी को तीन दिन के भीतर वाटर स्पो‌र्ट्स की अनुमति प्रदान करे। पीसीपीएनडीटी एक्ट क्रियान्वयन को लेकर हाई कोर्ट गंभीर नैनीताल : उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम-1994 (पीसीपीएनडीटी) के अंतर्गत स्टेट एडवाइजरी कमेटी के गठन का नोटिफिकेशन जारी करने के आदेश पारित किए हैं। साथ ही केंद्र सरकार को तीन माह के भीतर सेंट्रल बोर्ड के गठन का गजट नोटिफिकेशन जारी करने को कहा है।

हरिद्वार निवासी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय वर्मा ने जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि केंद्र सरकार द्वारा प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण पर रोक के लिए एक्ट तो बना दिया, मगर एक्ट के प्रावधानों के अंतर्गत नोटिफिकेशन जारी नहीं किए गए। जिस कारण यदि कोई इसकी शिकायत करना चाहता है तो सक्षम अथॉरिटी नहीं है। याचिका में एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर केंद्र व राज्य सरकार को दिशा-निर्देश जारी करने की प्रार्थना की गई है। याचिका में एक्ट की धारा-17 की उप धारा दो व 34 का खास तौर पर उल्लेख किया गया है। कहा है कि सरकार द्वारा रेगुलशन नहीं बनाने से एक्ट निष्प्रभावी हो रहा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की कोर्ट ने जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए राज्य व केंद्र सरकार को तीन माह के भीतर एक्ट की धारा-17(2) के अंतर्गत स्टेट एडवाइजरी कमेटी बनाने व धारा-33 के अंतर्गत सेंट्रल बोर्ड के गठन का गजट नोटिफिकेशन जारी करने के आदेश पारित किए हैं।

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