दीप सिंह बोरा, अल्मोड़ा। जंगली जानवरों से फसल क्षति का मामला हो या गुलदार के हमले में मवेशी के मारे जाने की घटना। प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा पाने के लिए अब जांच की कसौटी पर खरा उतरना होगा। बढ़ते आंकड़े व बढ़ती देनदारी से सकते में आए शासन के नकेल कसने के बाद वन विभाग भी सख्त हुआ है। इसके तहत पशु क्षति की कोई भी घटना होने पर वन रक्षक व दरोगा मुआयना कर जमीनी रिपोर्ट देंगे। फिर डीएफओ के निर्देशन में गठित संबंधित प्रभाग के क्षेत्राधिकारियोंकी टीम स्क्रूटनी करेगी। जांच में मवेशी मारे जाने के पुख्ता सबूत मिलने के बाद ही पशुपालक को क्षतिपूर्ति का चेक मिलेगा।

पहाड़ में मानव एवं वन्यजीव टकराव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वहीं गुलदारों के द्वारा मवेशियों के मारे जाने का ग्राफ भी तेजी से बढ़ रहा। पिछले चार वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो राज्यभर में वर्ष 2015-16 में 3234 मवेशी शिकार हुए। 2017 में मामले बढ़कर 4943 हो गए। 2018 में यही आंकड़ा 9945 और अब 15 हजार के पार जा पहुंचा है। पशु क्षति से जुड़े आवेदन वास्तविक हैं या एक ही घटना को दोबारा दर्शा कर मुआवजा लेने की कोशिश, इसकी तह तक जाने के लिए वन मुख्यालय हरकत में आ गया है। वित्त एवं नियोजन अनुभाग की सख्ती के बाद अब सभी वन प्रभागों ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपना लिया है। यानी गहन जांच व परीक्षण के बाद ही पशु क्षति का मुआवजा मंजूर किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक पैनी निगाह के लिए उच्च स्तर पर भी हाई पॉवर कमेटी गठित की गई है जिसकी निगरानी मुख्य वन संरक्षक करेंगे।

जांच के बाद ही मिलेगा बजट

हालिया अल्मोड़ा प्रभाग में लंबित पड़े पशु क्षति के 850 प्रकरणों के निपटारे को शासन ने डीएफओ के प्रस्ताव पर 1.05 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत तो कर दिया। मगर अब इन प्रकरणों की जांच सही मिलने पर ही आवेदनकर्ता के बैंक खाते में मुआवजा राशि जमा की जा सकेगी।

वन रक्षक की रिपोर्ट की भी तहकीकात

डीएफओ कुंदन कुमार के निर्देशन में अल्मोड़ा, रानीखेत व सोमेश्वर रेंज के वन क्षेत्राधिकारियों की कमेटी गठित कर ली गई है, जो स्क्रूटनी करेंगे। पता लगाया जाएगा कि गुलदार के हमले में वाकई मवेशी मारा गया या घायल हुआ। संबंधित वन दरोगा व रक्षक ने मुआयना किया या नहीं। मृत पशु के फोटोग्राफ लिए गए या नहीं।

पहले ये थी व्यवस्था

=पूर्व में प्रभावित पशुपालक मौके के फोटोग्राफ व आवेदन खुद ही करता था। अब घटना की सूचना पर वन रृक्षक व दरोगा करेंगे मुआयना।

=अब तक प्रभावित ग्रामीण की गुहार पर वन रक्षक आगे बढ़ाते थे आवेदन। अब वन क्षेत्राधिकारियों की स्क्रूटनी पर डीएफओ करेंगे संस्तुति

=पहले वित्त अनुभाग डीएफओ की संस्तुति पर करते थे बजट स्वीकृत, अब वन संरक्षकों के निर्देशन में बनी कमेटी भी करेगी संस्तुति।

=इससे पूर्व आधारकार्ड जरूरी जरूरी नहीं था, अब आवेदन के साथ लगेगा ताकि कोई व्यक्ति एक घटना को दोबारा न दर्शा सके। डीएफओ अल्मोड़ा कुंदन कुमार का कहना है कि पशु क्षति से जुड़े आवेदनों की गहनता से जांच कराई जाएगी। जांच कमेटी गठित की है। वन दरोगा व वन रक्षक ने मौका मुआयना कर पूरे साक्ष्य जुटाए हैं या नहीं कमेटी स्क्रूटनी करेगी। तथ्य सही मिलने पर ही मुआवजे की राशि स्वीकृत की जाएगी। ताकि पात्र को ही क्षतिपूर्ति मिल सके। इसका मकसद पशु क्षति के नाम पर दोहरा लाभ अथवा फर्जीवाड़ा पर अंकुश लगाना है।

यह भी पढ़ें : ऑस्ट्रेलिया से टीपू सुल्तान लेकर आया था यूकेलिप्टिस

Posted By: Skand Shukla

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस