जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : बिना परीक्षा के ही परिणाम जारी हो गया। ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ है। जब परिणाम जारी हुआ तो पुराने प्रदर्शन के आधार पर अंक दे दिए गए। पर इन अंकों पर संतोष करना कैसे मुमकिन होगा? इसी उधेड़बुन के बीच विद्यार्थियों के लिए मनोविज्ञानियों व प्रधानाचार्यों की सलाह है कि न निराश होने की जरूरत है, न ही उत्साहित होने की आवश्यकता है। उनका कहना है, अपनी मेहनत में कमी न आने दें। अंकों के इस गेम पर बहुत अधिक उलझने के बजाय अपनी तैयारी जारी रखें। विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि अभिभावक भी इस परिस्थिति को स्वीकार करें।

सेंट लॉरेंस की प्रधानाचार्य अनीता जोशी ने बताया कि कुछ दिक्कतों को छोड़ दें तो बाकी का परीक्षा परिणाम बेहतर है। कोविड के दौर में विकल्प भी ज्यादा नहीं थे। पुराने प्रदर्शन को आधार माना गया है। इसलिए परीक्षाफल को लेकर संतोष किया जाना चाहिए। अभिभावकों को भी दबाव बनाने की जरूरत नहीं है। भविष्य में और अच्छी मेहनत से लक्ष्य हासिल करें।

सिंथिया की प्रधानाचार्य प्रवींद्र रौतेला का कहना है कि जितना बेहतर संभव हो सकता है। सीबीएसई ने मेहनत की है। कम अंक आए या ज्यादा। इसे लेकर ज्यादा गंभीर होने की जरूरत नहीं है। आगे की तैयारी जारी रखें। अगर किसी के कम अंक आए हैं तो वह दोबारा परीक्षा दे सकता है। बोर्ड ने इसकी भी तैयारी की है। इसलिए परीक्षाफल को स्वीकार करें।

बिड़ला की शिक्षिका बीना जोशी का कहना है कि इस बार का परीक्षाफल पुराने नतीजों के आधार पर बनाया गया है। इसलिए इसे सामान्य परीक्षाफल कहा जा सकता है। कोविड-19 के दौर में इससे बेहतर विकल्प भी नहीं हो सकता था। इसलिए इस परीक्षा परिणाम को लेकर बहुत अधिक तनाव लेने की जरूरत नहीं है। इसलिए अपनी मेहनत जारी रखें।

एसटीएच के डा. युवराज पंत ने बताया कि कोविडकाल में पढ़ाई का माहौल नहीं रहा। यह स्थिति व्यक्तिगत नहीं है। देश-दुनिया में एक जैसे हालात रहे। इसलिए परीक्षा परिणाम को स्वीकार करना चाहिए। बहुत अधिक उत्साहित होने की जरूरत नहीं है और न ही निराश होने की। वैसे भी नंबर गेम से बुद्धिमता के आकलन का आधार नहीं है।

मनोचिकित्सक डा. रवि भैंसोड़ा ने बताया कि आने वाले समय में प्रतियोगी परीक्षाएं ही महत्वपूर्ण साबित होंगी। इसलिए मन लगाकर उसकी तैयारी करें। गहन अध्ययन और ज्ञान आपके काम आएगी। कोरोना के माहौल में जिस तरह का परिणाम रहा। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। खाली समय में संगीत सुनें। अपने शौक पूरा करें। जीवन के बेहतर बनाने की कोशिश करें।

Edited By: Prashant Mishra