किशोर जोशी, नैनीताल : करीब तीन सौ करोड़ के एनएच मुआवजा घोटाले में दो आइएएस अफसरों को निलंबित करने की कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलके में खलबली मच गई है तो इस मामले में जेल में बंद आरोपितों पर अभियोजन पक्ष आरोपों को अदालत में साबित करने की तैयारी में जुट गया है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार एनएच-74 चौड़ीकरण मामले में मामले में एसआइटी अब तक ऊधमसिंह नगर के निलंबित एसएलओ डीपी सिंह, निलंबित एसडीएम भगत सिंह फोनियां, प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पलडि़या, रिटायर्ड प्रभारी तहसीलदार भोले लाल, निलंबित एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह, चकबंदी अधिकारी अमर ंिसह, पेशकार संतराम, पूर्व पेशकार संजय, स्टांप वेंडर जिशान, जसपुर के अनुसेवक रामसनुज, निलंबित संग्रह अमीन अनिल कुमार, पूर्व पेशकार विकास चौहान, किसान चरण सिंह, ओमप्रकाश के खिलाफ विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण नैनीताल की कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इस घोटाले की साजिश में आरोपित बिल्डर प्रिया शर्मा, प्रिया की कंपनी के निदेशक सुधीर चावला के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है। हजारों पेज के आरोप पत्र में एसआइटी ने सिलसिलेवार रिपोर्ट तैयार की है कि किस तरफ आरोपितों द्वारा एक राय होकर साजिशन बैक डेट में भूमि की 143 की कार्रवाई कर राजकोष को लगभग पांच सौ करोड़ का नुकसान पहुंचाया। दस मार्च 2014 को आरोपितों के खिलाफ ऊधमसिंह नगर के एडीएम प्रताप शाह द्वारा मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना में 211 करोड़ का घोटाला साबित

नैनीताल: एसआइटी की जांच में अब तक 211 करोड़ का घोटाला साबित हो चुका है। दो फरवरी को अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में दाखिल की गई रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। जबकि आरोप यह है कि पांच सौ करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया। जिला जज एवं विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण नरेंद्र दत्त की कोर्ट में अभियोजन पक्ष 19 सितंबर को आरोप तय करने की तैयारी में जुटा है। हाई कोर्ट से भी नहीं मिली जमानत

नैनीताल: एनएच घोटाला मामले में जेल में बंद मुख्य आरोपित पूर्व एसएलओ डीपी सिंह समेत अन्य द्वारा जमानत के लिए हाई कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। मगर अब तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली। आरोप इतने गंभीर हैं कि अदालत से अब तक जमानत नहीं मिल सकी है।

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