रुद्रपुर, जेएनएन : हाईवे चौड़ीकरण की राह में मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रहीं। भूमि की अनुपलब्धता और बजट का अभाव जनता को हाईवे के गडढों में ठोकरें खिला रहा है। आलम यह है कि एनएच-74 पर कई जगह काम रुका हुआ है तो एनएच-87 का चौड़ीकरण कर रही निर्माणदायी संस्था बोरिया-बिस्तर समेटने की फिराक में है। इसके पीछे शासन प्रशासन की लाल-फीताशाही जिम्मेदार है। लोग आंदोलित हैं पर जिम्मेदार प्रशासनिक और एनएचएआई अफसर सुनने को तैयार नहीं।  

ऊधमसिंह नगर जिले में काशीपुर से सितारगंज (एनएच-74) और रामपुर से काठगोदाम (एनएच-87) के चौड़ीकरण का काम लंबे समय से चल रहा है। एनएच-74 पर मुआवजा घोटाले ने ब्रेक लगाया तो एनएच 87 में गैरजिम्मेदार निर्माणदायी संस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। 

एनएच-74 की बात करें तो काशीपुर से सितारगंज तक 77.200 किलोमीटर लंबे हाईवे के चौड़ीकरण का श्रीगणेश 5 मार्च 2014 को हुआ था। अनुबंध के अनुसार निर्माणदायी संस्था गल्फार को निर्माण से पूर्व 80 फीसद जमीन खाली मिलनी चाहिए थी पर मिली सिर्फ 26 मीटर। ऐसे में 31 अगस्त 2016 तक कार्य पूरी करने की मियाद खिंचती चली गई। जुलाई 2017 तक कंपनी ने 65.250 किलोमीटर सड़क बनाई। तब से अब तक 11.09 किलोमीटर सड़क अधूरी पड़ी है और प्रशासन निर्माणदायी संस्था को भूमि उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। कई स्थानों पर काम रुका हुआ है। इधर, अवधि निकलने के बाद भी काम पूरा न होने पर बैंक ने बकाया 37 करोड़ का कर्ज देने से भी इनकार कर दिया है। बैंक से कर्ज को एक्सटेंशन ऑफ टाइम की प्रति चाहिए जिसके लिए एनएचएआई पिछले छह माह से टरका रही है। एनएचएआई अपनी 35 करोड़ की देनदारी में भी लेटलतीफी कर रही। 

यही हाल एनएच 87 का भी है। कार्यदायी संस्था सदभाव ने नैनीताल मार्ग पर मॉल व कलेक्ट्रेट के सामने दिन रात एक कर कार्य को गति दी तो लगा कि काम बहुत जल्द निपट जाएगा, लेकिन अचानक ही काम पर ब्रेक लग गया। एक माह से भी अधिक समय से काम पूरी तरह से ठप पड़ा है। जिसके चलते नैनीताल मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। कार्यदायी संस्था के सामने खड़े हुए आर्थिक संकट के चलते हाथ खींच लेने के कारण काम रुकने के कारण दिक्कतें पैदा हो रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर हाईवे का निर्माण कैसे पूरा होगा?

एनएच 74 पर हटना है ये अतिक्रमण

रुद्रपुर शहर : दो कालोनी गेट, डेढ किलोमीटर पैच में 27 दुकानें, 11 भवन, दो धर्मकांटे, 265 मीटर दीवार, मेडिसिटी के पास पुल पर सर्विस लेन की स्वीकृति, केएलए के बाहर का हिस्सा

गदरपुर : 650 मीटर भूमि की अनुपलब्धता, तेल मिल का आधा भाग उत्तर प्रदेश तथा आधा उत्तराखंड में, तीन मंदिर, 12 इमारतें, नौ राइस मिल, एक पीपल पेड़, एक सरकारी नल।

एनएच 74 में यहां फंसा है निर्माणदायी संस्था का फंड 

  • ईओटी न मिलने से बैंक नहीं दे रहा 37 करोड़ का कर्ज
  • 11.38 करोड़ चेंज ऑफ लॉ के तहत एनएचएआई के पास फंसे हैं
  • एनएचएआई को देनी है 15 करोड़ की ग्रांट 
  • अन्य इश्यू के 7-8 करोड़ भी एनएचएआई के पास फंसे

एनएच 87 पर नहीं बनेगा फ्लाईओवर

सोनिया होटल से शुरू होकर 31 वाहिनीं पीएसी से आगे उतरने वाला फ्लाई ओवर फिलहाल खटाई में है। पिलर पर फ्लाईओवर का असर प्रोजक्ट की लागत पर पडऩे से इसे प्रोजेक्ट से हटाने का निर्णय लिया गया है। फ्लाई ओवर के लिए अब अलग से प्रक्रिया प्रारंभ होगी, तब तक हाईवे चौड़ीकरण कर काम चलाया जाएगा।   

बजट मिलेगा तो सड़क बनाने में क्‍या दिक्‍कत 

पीके चौधरी, वरिष्ठ प्रबंधक, गल्फार इंजीनियरिंग लि. ने बताया कि प्रशासन हमें भूमि उपलब्ध कराए तो हमें सड़क बनाने में भला क्या दिक्कत। सड़क बनेगी तो टोल बढ़ेगा और कंपनी घाटे से उबरेगी। एनएचएआई से ईओटी न मिलने से बैंक कर्ज नहीं दे रहे। भूमि उपलब्ध कराने के लिए हम परियोजना निदेशक से पत्राचार कर रहे हैं। 

काफी हद तक दिक्‍कतों का निस्‍तारण कर दिया गया है

बीपी पाठक, परियोजना निदेशक एनएचएआई ने कहा कि रामपुर-काठगोदाम हाईवे का रुका कार्य जल्द प्रारंभ होगा। कार्यदायी संस्था के सामने कुछ दिक्कतें थी, वार्ता के बाद काफी हद तक उसको निस्तारित कर दिया गया है। एनएचएआई जनता को आने वाली दिक्कतों का समझता है, जिसके कारण हर वह प्रयास किए जा रहे हैं जिससे प्रोजक्ट को जल्द पूरा किया जा सके।

Posted By: Skand Shukla

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