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नैनीताल में खुले में बहता सीवर: झील को खतरा, संक्रमण का डर, क्या ज्योलीकोट जैसी होगी स्थिति?

Published: Sat, 12 Sep 2026 02:25 PM (IST)

नैनीताल में 50 साल पुरानी सीवर लाइनें ओवरफ्लो होकर खुले में बह रही हैं, जिससे नैनी झील प्रदूषित हो रही है और संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।

ज्योलीकोट की तरह नैनीताल में भी मुसीबत न बन जाए खुले में बहता सीवर।

ज्योलीकोट की तरह नैनीताल में भी मुसीबत न बन जाए खुले में बहता सीवर।

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संक्षेप में पढ़ें

नरेश कुमार, नैनीताल। शहर में 50 वर्ष से भी अधिक उम्रदराज हो चुकी सीवर लाइनें जगह-जगह जवाब देने लगी हैं। जिससे लाइनों के ओवरफ्लो होकर सीवर खुले में बहना आम बात हो गई है। वर्षा के दौरान तो यह समस्या और विकट हो जाती है। नालों से होते हुए यह सीवर झील में समा रहा है, लेकिन रोकथाम के लिए जिम्मेदारों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। यही स्थिति रही तो ज्योलीकोट की तरह नैनीताल में भी खुले में बहता सीवर मुसीबत न बन जाए।

शहर को 80 के दशक तक पूरी तरह सीवर लाइन से आच्छादित कर दिया गया था। इस समय आबादी के साथ ही पर्यटन कारोबार सीमित था। करीब पांच दशक बीतने के बाद स्थानीय लोगों की आबादी के साथ ही पर्यटकों की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी हो गई है, लेकिन सीवर लाइन की क्षमता बढ़ोतरी की कोई कवायद नहीं हुई।

नतीजतन क्षमता से अधिक पर्यटकों के पहुंचने व वर्षा के दौरान सीवर लाइनें ओवरफ्लो हो जाती हैं। नालों से होते हुए यह गंदगी झील की सेहत तो बिगाड़ ही रही है। साथ ही लोगों को संक्रमण का भी खतरा बना हुआ है।

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दो साल बाद भी धरातल पर नहीं उतरी योजना

पूर्व में मुख्यमंत्री के 30 वर्ष से अधिक पुरानी सीवर लाइनों को बदलने की घोषणा को देखते हुए जल निगम ने 2024 में नैनीताल की पुरानी लाइनों को बदलने के लिए 112 करोड़ का प्रस्ताव बनाया था, लेकिन दो साल बाद भी यह प्रस्ताव धरातल पर नहीं उतर सका।

जल निगम अधिशासी अभियंता शशिपाल सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया था, लेकिन मुख्यालय स्तर से कुछ बिंदुओं पर आपत्ति लगने के साथ ही पूरे शहर की लाइनों को बदलने का प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए थे। पूरे शहर की पुरानी लाइनों को बदलने के लिए इन दिनों विभाग की ओर से सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही नई डीपीआर बनाकर शासन को भेज दी जाएगी।

नई लाइन डालने से ही होगा समाधान

जल संस्थान के अपर सहायक अभियंता चेतन कुमार ने बताया कि करीब 50 वर्ष पूर्व सीवर लाइन को उस समय की क्षमता के आधार पर डिजाइन किया गया था। वर्तमान में शहर में 5811 सीवर संयोजन जुड़े हैं जबकि पर्यटकों का दबाव इससे कई गुना अधिक रहता है।

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पर्यटकों का दबाव बढ़ने के अलावा कई लोग सीवर चेंबर में मलबा, कपड़े व अन्य गंदगी भी डाल देते हैं। वहीं कई लोगों के वर्षा जल का कनेक्शन भी सीवर से जुड़े होने के कारण ओवरफ्लो की समस्या खड़ी होती है। जिसकी रोकथाम को पुरानी लाइनों को बदलने, सीवर चेंबर में गंदगी न डालने व वर्षा जल का कनेक्शन सीवर लाइनों से हटाना ही समाधान है।

पूरे शहर में सीवर लाइन बिछाने के लिए नया प्रोजेक्ट बनाया जाना है। सर्वे के लिए शासन से 103 लाख की डिमांड की गई है। हालांकि बजट की प्रत्याशा में सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया है। जल्द ही नई डीपीआर बनाकर मुख्यालय व शासन को भेज दी जाएगी। - शशिपाल सिंह अधिशासी अभियंता पेयजल निगम