क्या क्लासरूम में ‘भूत’ हैं? नैनीताल के स्कूल में अफवाहों ने कैसे फैलाई दहशत?
नैनीताल के हल्द्वानी स्थित एक स्कूल में यूनिट टेस्ट के दौरान एक छात्रा के चिल्लाने से 'भूत' की अफवाह फैल ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
HighLights
हल्द्वानी स्कूल में छात्रा के चिल्लाने से फैली दहशत।
'भूत' की अफवाह ने रद्द कराया यूनिट टेस्ट।
विशेषज्ञ बोले, यह 'मास हिस्टीरिया' का मामला था।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बीते दिन उत्तराखंड के स्कूलों में ऐसी चीजें हुईं कि लोग परेशान हो गए। इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि किस तरह एक छोटी सी अफवाह या गलतफहमी पूरे स्कूल परिसर में दहशत फैला सकती है।
हाल ही में नैनीताल जिले के हल्द्वानी (बनभूलपुरा क्षेत्र) स्थित 'ललित आर्य कन्या इंटर कॉलेज'में यूनिट टेस्ट के दौरान उस समय अचानक हड़कंप मच गया, जब 10वीं कक्षा की एक छात्रा अचानक चीखने-चिल्लाने लगी।
परीक्षा देते समय एक छात्रा की तबीयत बिगड़ी, वह असहज महसूस करने लगी और अचानक जोर-जोर से चिल्लाने लगी। छात्रा के इस व्यवहार को देखकर आसपास बैठी अन्य छात्राएं घबरा गईं। देखते ही देखते पूरे स्कूल में यह अफवाह फैल गई कि परिसर में "भूत या साया" आ गया है।
अफवाह के फैलते ही कई अन्य छात्राएं डर के मारे रोने लगीं और इधर-उधर भागने लगीं। इसके चलते स्कूल प्रशासन को तुरंत उस दिन का टेस्ट रद्द करना पड़ा और बच्चों को उनके घर भेजना पड़ा।
क्या है सच्चाई
स्कूल प्रशासन और प्रधानाचार्य के अनुसार, जब मामले की पड़ताल की गई तो सच्चाई कुछ और ही निकली, प्रभावित छात्रा स्कूल आने से पहले अपने घर पर रातभर चले एक धार्मिक आयोजन में शामिल हुई थी, जिसके कारण उसकी नींद पूरी नहीं हुई थी और वह पहले से ही अस्वस्थ महसूस कर रही थी।
घबराहट और शारीरिक कमजोरी की वजह से वह अचानक चिल्ला पड़ी थी, जिसे अन्य बच्चों ने अंधविश्वास और भूत-प्रेत के डर से जोड़ लिया। घटना के अगले दिन डर के कारण स्कूल में उपस्थिति काफी कम रही (लगभग 800 में से केवल 300 छात्राएं आईं)।
मनोवैज्ञानिक पहलू
विशेषज्ञों और डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी घटनाएं अक्सर 'मास हिस्टीरिया' (Mass Hysteria) या 'मास एंग्जायटी' के कारण होती हैं। जब किसी बंद जगह (जैसे कक्षा या हॉस्टल) में एक बच्चा अत्यधिक तनाव या डर के कारण अजीब व्यवहार करता है, तो उसे देखकर अन्य बच्चे भी डर के मारे वही लक्षण (चक्कर आना, रोना, चीखना) महसूस करने लगते हैं।
प्रशासन का कदम
स्कूल अधिकारियों और शिक्षकों ने अभिभावकों के साथ बैठक की और स्थिति को स्पष्ट किया। अभिभावकों को समझाया गया कि यह कोई अलौकिक या भूतिया घटना नहीं थी, बल्कि एक बच्चे की बीमारी और गलतफहमी का नतीजा थी, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो सकी।
