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    Nainital Panchayat Election: पांचों अपहृत जिला पंचायत सदस्य हाई कोर्ट में तलब, तीन दिसंबर को अगली सुनवाई

    Updated: Fri, 28 Nov 2025 04:48 PM (IST)

    नैनीताल उच्च न्यायालय ने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में विवाद, सदस्यों के अपहरण और मतपत्र में ओवरराइटिंग की शिकायत पर स्वतः संज्ञान लिया। अदालत ने एसएसपी नैनीताल को जांच रिपोर्ट पेश करने और कथित अपहृत सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं ने पुनर्मतदान की मांग की है, जबकि सदस्यों ने अपहरण से इनकार किया है। अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी।

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     अगली सुनवाई को तीन दिसंबर की तिथि नियत की है। फाइल

    जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने नैनीताल जिला पंचायत के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के चुनाव में हुए बवाल व पांच जिला पंचायत सदस्यों के कथित अपहरण व चुनाव में डाले गए एक मतपत्र में ओवरराइटिंग की शिकायत व जिला पंचायत के लिए पुनर्मतदान तथा निष्पक्ष चुनाव को लेकर स्वतः संज्ञान लेती सहित अन्य जनहित याचिका पर एक साथ सुनवाई की। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने एसएसपी नैनीताल को अब तक मामले की जांच की प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए है। अगली सुनवाई को तीन दिसंबर की तिथि नियत की है। खंडपीठ ने कथित तौर पर अपह्रत पांचों जिला पंचायत सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने को कहा है।

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    दरअसल 14 अगस्त को नैनीताल जिला पंचायत के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव के दौरान पांच सदस्यों के मतदान से पहले अपहरण करने से संबंधित वायरल वीडियो का स्वतः संज्ञान लिया था मामले में कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। जिला पंचायत सदस्य पूनम बिष्ट सहित पुष्पा नेगी ने याचिका दायर कर कहा है कि नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में एक मतपत्र में ओवर राइटिंग कर क्रमांक 1 को 2 कर अमान्य घोषित कर दिया गया। याचिका में कोर्ट से अध्यक्ष पद के लिए दुबारा मतदान कराने की मांग की थी।

    निर्वाचन आयोग में दिया था अपहरण नहीं होने का बयान

    जिपं के सदस्यों प्रमोद कोटलिया, डिकर सिंह मेवाड़ी, तरुण कुमार शर्मा, दीप सिंह बिष्ट व विपिन जंतवाल ने राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष पेशी में बयान दर्ज कराए थे कि उनका अपहरण नहीं हुआ है। उनका कहना था कि जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के अलावा नोटा का विकल्प नहीं था, वह निर्दलीय जीते थे, दोनों दलों से उनके व्यक्तिगत संबंध थे, वह किसी की भलाई-बुराई नहीं चाहते थे, इसलिए मतदान में हिस्सा नहीं लिया। उनका अपहरण नहीं हुआ, वह इच्छानुसार मतदान किए बिना चले गए, उनके साथ मारपीट या जबरन घसीटने की कोई घटना ही नहीं हुई थी। कोई हथियारबंद बदमाश भी नहीं देखा। चुनाव में भाजपा प्रत्याशी दीपा दर्मवाल ने जीत दर्ज की जबकि कांग्रेस समर्थित पुष्पा नेगी को हार का सामना करना पड़ा था।