नैनीताल हाई कोर्ट शिफ्टिंग को चिह्नित जमीन पर उठे सवाल, हल्द्वानी की हरियाली को होगा नुकसान
देहरादून में क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति की बैठक में नैनीताल हाई कोर्ट को हल्द्वानी में वन भूमि पर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर पर्यावरणीय चिंताएं उठाई गईं।

फाइल फोटो।

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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। देहरादून में शुक्रवार को क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति (आरईसी) की बैठक में नैनीताल हाई कोर्ट की शिफ्टिंग के लिए चिह्नित की गई जमीन के प्रस्ताव की समीक्षा की गई। इसमें विशेषज्ञों ने वन भूमि के चयन को लेकर पर्यावरणीय चिंता से जुड़े सवाल उठाए।
दरअसल, नैनीताल से हाई कोर्ट शिफ्ट करने के लिए हल्द्वानी में रामपुर रोड पर बेल बाबा मंदिर के सामने 30 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि चिह्नित की गई है। ऐसे में आरईसी की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा गया। इसमें केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने उत्तराखंड वन विभाग के अधिकारियों और नोडल एजेंसी पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से कई सवाल किए।
भाखड़ा रेंज में नहीं थे पेड़
सूत्रों के अनुसार, वन विभाग और पीडब्ल्यूडी की ओर से तराई पूर्वी वन प्रभाग की भाखड़ा रेंज में जगह चिह्नित करने के पीछे तर्क दिया गया कि वहां पर पेड़ नहीं थे। ऐसे में पेड़ों को काटने की नौबत नहीं आती। इसके साथ ही बताया गया कि आरक्षित वन भूमि के बदले क्षतिपूर्ति के लिए दोगुनी जमीन रामनगर और बेतालघाट ब्लाक में ढूंढ ली गई है।
भूमि हस्तांतरण को लेकर सभी नियमों का पालन किया जा रहा है। बैठक में वन संरक्षक नीतिश मणि त्रिपाठी, डीएफओ यूसी तिवारी, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता प्रत्यूष कुमार समेत अन्य उपस्थित रहे।
पूछा- क्षतिपूर्ति के लिए राजस्व भूमि क्यों नहीं ढूंढी
बैठक में विशेषज्ञों की ओर से पूछा गया कि वन भूमि के बदले क्षतिपूर्ति के लिए राजस्व भूमि क्यों नहीं ढूंढी गई। इस पर बताया गया कि राजस्व भूमि की उपलब्धता नहीं है। राजस्व भूमि की तलाश के लिए वर्ष 2024 में जिला प्रशासन, पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग की ओर से काफी प्रयास किए गए थे, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी थी।
प्रस्ताव पर जल्द होगा फैसला
समीक्षा बैठक में वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव के तमाम पहलुओं पर चर्चा हुई। प्रस्ताव पर समिति का फैसला जल्द जारी होगा, जिसके आधार पर अग्रिम कार्यवाही होगी।
बता दें कि समिति की स्वीकृति बेहद जरूरी है। इससे पहले जब गौलापार में हाई कोर्ट शिफ्ट होना था, तब फरवरी 2024 में आरईसी की बैठक में ही यह प्रस्ताव अस्वीकृत किया गया था। इसके बाद गौलापार में हाई कोर्ट शिफ्ट होने का मामला अटक गया था।
