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नैनीताल में धामी सरकार के सख्त भू-कानून का चला डंडा, 1.822 हेक्टेयर भूमि जब्त

Published: Sun, 27 Sep 2026 11:15 AM (IST)

नैनीताल में धामी सरकार के सख्त भू-कानून के तहत 1.822 हेक्टेयर भूमि राज्य सरकार में निहित की गई है।

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जागरण संवाददाता, नैनीताल। जिले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार की ओर से लागू सख्त भू-कानून पर तेजी से कार्रवाई चल रही है।

परगना मजिस्ट्रेट नैनीताल नवाजिश खलीक की कोर्ट ने धार्मिक एवं कृषि प्रयोजन के लिए क्रय की गई भूमि का निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप उपयोग नहीं किए जाने पर सात प्रकरणों में उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम के आदेश पारित करते हुए कुल 1.822 हेक्टेयर अर्थात 91 नाली एक मुट्ठी भूमि राज्य सरकार में निहित कर दी है।

एसडीएम ने बताया कि राजस्व अभिलेखों तथा स्थलीय जांच में पाया गया कि ग्राम कमड़ा, पट्टी मल्ली कुटौली एवं ग्राम शीतला, पट्टी मल्ली कुटौली में विभिन्न व्यक्तियों द्वारा धार्मिक प्रयोजन के लिए कुल 1.562 हेक्टेयर भूमि क्रय की गई थी। स्थलीय निरीक्षण के समय कोई धार्मिक गतिविधि संचालित नहीं पाई गई तथा भूमि खाली पड़ी हुई थी।

91 नाली एक मुट्ठी भूमि राज्य सरकार में निहित

ग्राम सतबूंगा, पट्टी सतबूंगा में कृषि प्रयोजन के लिए क्रय की गई 0.260 हेक्टेयर भूमि का कृषि कार्य में उपयोग नहीं किया जा रहा था और भूमि मौके पर बंजर अवस्था में पाई गई। संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने तथा आवश्यक अभिलेख एवं साक्ष्य प्रस्तुत करने का समुचित अवसर प्रदान किया गया।

तत्पश्चात क्रय संबंधी अनुमति, राजस्व अभिलेखों, अनुमति की शर्तों, उपलब्ध साक्ष्य एवं स्थलीय जांच आख्या का परीक्षण करने पर यह प्रमाणित हुआ कि संबंधित भूमि का उपयोग उस विशिष्ट प्रयोजन के लिए नहीं किया गया, जिसके आधार पर उसे क्रय करने की अनुमति प्रदान की गई थी।

इसके बाद एसडीएम कोर्ट ने सातों प्रकरणों में संबंधित मामलों को विधि-विरुद्ध मानते हुए उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम के तहत कुल 1.822 हेक्टेयर भूमि राज्य सरकार में निहित किए जाने का आदेश पारित किया गया। आदेश के अनुपालन में संबंधित राजस्व अधिकारियों को राजस्व अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टि अंकित करने तथा भूमि के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

डीएम ललित मोहन रयाल ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा भूमि क्रय-विक्रय को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनसम्मत बनाना है। स्पष्ट किया कि भू-कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जाएगी।