नैनीताल की मोमबत्ती कला पर मंदी का साया: कारोबार सिमटा, पहचान बचाने की चुनौती
नैनीताल का प्रसिद्ध मोमबत्ती उद्योग वैश्विक तनाव, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और चीनी प्रतिस्पर्धा के कारण मंदी का सामना ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

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किशोर जोशी, नैनीताल। नैनीताल आने वाला हर पर्यटक झील की खूबसूरती के साथ-साथ यहां की कलात्मक मोमबत्तियों की जगमगाहट को अपनी यादों में समेटकर घर ले जाता था। फलों और ऐपण कला के सुंदर आकारों में ढली ये मोमबत्तियां सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि नैनीताल की निशानी का प्रतीक थीं।
वैश्विक तनाव, महंगे कच्चे माल और चीनी मोमबत्तियों की होड़ ने इस खूबसूरत कुटीर उद्योग की लौ को धीमा कर दिया है। 1970 के दशक से चमकी यह रोशनी अब सिर्फ दो फैक्ट्रियों तक सिमटकर अपनी पहचान बचाने के अस्तित्व को लड़ रही है।
दरअसल शहर में मोमबत्ती बनाने का कारोबार 1970 के दशक में शुरू हुआ। 1990 के दशक में पर्यटन कारोबार में तेजी आई तो मोमबत्ती उद्योग को भी नई पहचान मिली। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी इस कारोबार का विस्तार होता रहा, लेकिन वर्ष 2010 के बाद चीनी मोमबत्तियों की बढ़ती आमद ने स्थानीय उत्पादकों के सामने चुनौती खड़ी कर दी।
कभी शहर में करीब एक दर्जन फैक्ट्रियां संचालित होती थीं, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर दो रह गई है। इस साल पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच ईरान से मोम की आवक बंद हो गई तो चीन से भी अघोषित तौर पर आपूर्ति ठप है। इस वजह से मोमबत्ती के दाम में दस से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो गई है। इस वजह से मोमबत्ती के दाम में दस से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो गई है।
महंगे मोम ने बढ़ाई कारोबारियों की चिंता
नैनीताल में तैयार होने वाली मोमबत्तियां अपनी कलात्मक बनावट और अलग-अलग आकारों के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। यहां विभिन्न आकार की मोमबत्तियां तथा दीयों सहित कई अन्य डिजाइनों की मोमबत्तियां बनाई जाती हैं। शहर की करीब दो दर्जन दुकानों पर इनकी बिक्री होती है।
दीपावली पर दीये के आकार की मोमबत्तियों की खूब बिक्री होती है। पिछले साल से यहां ऐपण कला पर आधारित मोमबत्तियों का रुझान (चलन) बढ़ा है। एक दशक पहले तक यहां मोमबत्ती का कारोबार करीब तीन करोड़ रुपये के आसपास था जो अब घटकर प्रतिवर्ष करीब 35 लाख रुपये रह गया है।
फिलहाल चीन से भी मोम की आवक बंद है और खाड़ी युद्ध की वजह से ईरान से भी मोम आना बंद हो गया है। कच्चा माल पहले से महंगा हो गया है। कारोबार पूरी तरह पर्यटकों की खरीदारी पर ही निर्भर है। 1986 में काम शुरू किया था, तब हालात बेहतर थे। दीपावली पर ऐपण आधारित मोमबत्तियों को प्रमोट किया जा रहा है। - राजीव बुढ़लाकोटी, मोमबत्ती फैक्ट्री संचालक
मोम के दाम में हर सप्ताह उतार-चढ़ाव आ रहा है। सजावटी मोमबत्तियों को पर्यटक अधिक पसंद करते हैं। फिलहाल बिक्री सामान्य है। 70 रुपये से लेकर डेढ़ हजार रुपये तक की मोमबत्तियां उपलब्ध हैं। एक साल में मोम की कीमत 55 रुपये प्रतिकिलो से बढ़कर 200 रुपये हो गई है। - गीतांजलि, मोमबत्ती विक्रेता
मोमबत्ती नैनीताल की पहचान है। अधिकतर खरीदारी पर्यटक ही करते हैं। मोम महंगा होने से मोमबत्तियां 10 से 20 प्रतिशत तक महंगी हो गई हैं। अब बिक्री पिछले सालों की तुलना में कम हो गई है। पूरा मोमबत्ती कारोबार पर्यटन व्यवसाय पर ही टिका है। - गौरव पोखरिया, मोमबत्ती विक्रेता
