नैनीताल (नैनीताल) : बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने वाली राम की लीलाओं का मंचन सांप्रदायिक रूढिय़ों की भी तोड़कर सामाजिक एकता का भी संदेश देती है। हल्द्वानी की रामलीला इस मामले में मिसाल कायम करती हैं, जहां रामलीला आयोजन में बैंड पार्टी के मुस्लिम कलाकार रामधुन बजाते हैं। बकायदा एक महीना पहले नए भजनों का अभ्यास करते हैं और रामलीला संपन्न होने तक पूरी जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभाते हैं।

हल्द्वानी के रामलीला मैदान में होने वाली रामलीला तकरीबन 135 वर्ष पुरानी है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान की लीलाओं का मंचन के दौरान सभी का ध्यान पात्रों पर होता है। कुछ ऐसे भी कलाकार हैं जिनकी भूमिका मंच पर भले ही नजर नहीं आती, लेकिन दूसरे समुदाय से ताल्लुक रखने के बावजूद उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पिछले आठ-दस सालों से हल्द्वानी के मास्टर बैंड से जुड़े कुछ मुस्लिम कलाकार ऐसे भी हैं, जो रामलीला में भजन, आरती और रामधुन बजाते हैं। यहां खुले मैदान में रामलीला होती है। ग्रीन रूम से मैदान के बीचोंबीच तक रामलीला के पात्रों को ले जाने के लिए बैंड कलाकार रामधुन बजाते हुए उन्हें मंच तक ले जाते हैं, यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। क्योंकि हल्द्वानी में रामलीला मंच की बजाए खुले मैदान में होती है।

गौला किनारे करते हैं अभ्यास

रामलीला में बैंड बजाने वाले मुस्लिम कलाकार जाहिद, नबी अहमद, तौफीक अहमद, अबरार हुसैन, अनवर अली, रिफाकत व पप्पू अपने साथियों के साथ गौला नदी के किनारे बैंड पर नई धुन बजाने का अभ्यास करते हैं।

बैंड बाजों के साथ है पुराना नाता

बैंड पार्टी से जुड़े ज्यादातर मुस्लिम कलाकारों रोजी-रोटी के लिए बैंड पार्टी से जुड़े हैं। रामलीला में बैंड पार्टी का नेतृत्व कर रहे मास्टर जाहिद बताते हैं कि शकील भाई बैंड पार्टी के मालिक हैं। वो और उनके जैसे कई कलाकार पिछले काफी सालों से उनके साथ काम कर रहे हैं। सालभर वह यही काम करते हैं।

Posted By: Skand Shukla