रामनगर, जागरण संवाददाता : कार्बेट टाइगर रिजर्व में घडिय़ालों की संख्या में अब इजाफा होने की उम्मीद है। अपेक्षा के अनुरूप घडिय़ालों की कम होती संख्या के बीच विभाग के लिए सुखद खबर है सर्पदुली रेंज में घडिय़ालों के अंडों से 50 से अधिक बच्चे पैदा हुए हैं। हालांकि बरसात के मौसम में सर्वाइव करना इन बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा। यदि यह बाढ़ से बच जाएंगे तो कार्बेट में अच्छी खासी संख्या घडिय़ालों की हो जाएगी।

कार्बेट में 2008 में 128 घडिय़ाल थे। वर्ष 2020 में इनकी संख्या बढऩे की जगह घटकर 96 ही रह गई थी। घटती संख्या से चिंतित विभाग ने फिर से वर्ष 2021 में कार्बेट की जीवनदायिनी रामगंगा नदी में नवंबर में जलीय जीवों की गणना कराई थी। 2022 में जारी की गई नई गणना में घडिय़ालों की संख्या 116 पहुंच गई थी।

हर साल मई जून में घडिय़ाल अंडे देते हैं। कार्बेट के सर्पदुली रेंज में ढिकाला ब्लाक रामगंगा नदी के समीप घडिय़ालों ने अंडे दिए थे। इन अंडों की विभागीय कर्मी निगरानी भी कर रहे थे। सोमवार को विभाग की शोध टीम के वरिष्ठ वन्य जीव वैज्ञानिक डा. शाह बिलाल, वन दरोगा महेंद्र सिंह रावत ने अंडों से पैदा हुए बच्चों को देखा। घडिय़ाल के 50 से अधिक बच्चे पैदा हुए हैं।

घडिय़ालों की बढ़ती संख्या विभाग के लिए सुखद है। क्योंकि कार्बेट घडिय़ालों के लिए सुरक्षित जगह मानी जाती है। घडिय़ाल क्रिटिकल एंडेंजर व शेडयूल वन की सरीसृप प्रजाति है। वहीं अब कार्बेट पार्क में सफारी के लिए आने वाले पर्यटक टाइगर के साथ घड़ियाल का भी दीदार कर सकेंगे।

सीटीआर के उपनिदेशक नीरज शर्मा ने बताया कि घडिय़ालों के 50 से अधिक बच्चे पैदा हुए हैं। इनके संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं। रोजाना उनकी निगरानी के लिए टीम को कहा गया है। हालांकि घडिय़ाल के बच्चे अक्सर नदी की बाढ़ में बह जाते हैं। बाढ़ से बचना इनके लिए चुनौती है। यदि यह सब सर्वाइव कर गए तो कार्बेट में घडिय़ालों की संख्या पहले से काफी बढ़ जाएगी।

Edited By: Skand Shukla