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एडमिशन फॉर्म तक नहीं भर रहे जेन-जी, साइबर कैफे ने रिकॉर्ड में जिंदा पिता को मार डाला, आधार में भी छेड़छाड़

Published: Fri, 28 Aug 2026 04:14 PM (IST)

साइबर कैफे संचालकों की लापरवाही से हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज में 150 से अधिक छात्रों के प्रवेश रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं।

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सुमित जोशी, हल्द्वानी। स्मार्ट फोन पर चैटिंग और रील देखने में व्यस्त रहने वाले जेन-जी स्नातक का प्रवेश फार्म तक नहीं भर रहे हैं। साइबर कैफे की मदद से आवेदन करवाया जाता हैं, लेकिन यह छात्र-छात्राओं पर भारी पड़ रहा है।

कैफे संचालकों ने आनलाइन फार्म भरते समय कई विद्यार्थियों के रिकार्ड में गड़बड़ी की है। एमबीपीजी कालेज में 150 से अधिक ऐसे में मामले सामने आए हैं।

जिसमें यूजी प्रथम सेमेस्टर के एक छात्र के जिंदा पिता को रिकार्ड में मरा हुआ दर्ज कर दिया। साथ ही कुछ छात्राओं की फोटो की जगह किसी अन्य महिला का चित्र अपलोड किया गया था। वहीं, कई विद्यार्थियों के आधार कार्ड में छेड़छाड़ करते हुए फोटो बदले गए हैं।

कालेज प्रशासन की ओर समर्थ पोर्टल पर आइडी कार्ड जारी किए जाने के बाद साइबर कैफे की करतूत सामने आई हैं। परिचय पत्र में त्रुटि होने पर विद्यार्थी महाविद्यालय में संपर्क कर सुधार करवा रहे हैं। इस स्थिति को देख प्राध्यापक और कर्मचारी भी चकित हैं। ऐसे में अब दोबारा रिकार्ड का मूल दस्तावेजों से मिलान करना पड़ रहा है।

अपार व एबीसी आइडी की जगह आधार नंबर दर्ज 

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकार्ड आनलाइन करना अनिवार्य किया है। जिसके लिए अपार व एबीसी आइडी की व्यवस्था बनाई गई है। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने इस वर्ष अपार आइडी होने पर ही स्नातक के विद्यार्थियों का प्रवेश सत्यापित करने की व्यवस्था बनाई है।

एमबीपीजी कालेज प्रशासन महाविद्यालय के आनलाइन प्रवेश फार्म पर अपार का विकल्प दिया है। इसे दर्ज किए बगैर फार्म जमा नहीं हो रहा है। ऐसे में साइबर कैफे संचालक खेल करते हुए अपार अथवा एबीसी आइडी के बदलते आधार संख्या दर्ज कर रहे हैं। इससे कालेज को दिक्कत हो रही है।

स्नातक प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश ले चुके विद्यार्थियों के आइडी कार्ड जनरेट कर दिए गए हैं। आवेदन के दौरान छात्र-छात्राओं की ओर से त्रुटि किए जाने के कुछ मामले आए हैं। जिन्हें जांच के बाद सुधारा जा रहा है। - प्रो. एनएस बनकोटी, प्राचार्य