जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : केवल शिक्षण शुल्क यानी ट्यूशन फीस में भौतिक रूप से कक्षाएं संचालित करने पर पब्लिक स्कूलों ने असमर्थता जता दी है। स्कूलों का तर्क है कि ट्यूशन फीस से ट्रांसपोर्ट, सैनिटाइजेशन आदि का खर्च उठाना स्कूलों के लिए संभव नहीं है। भौतिक रूप (ऑफलाइन) से शिक्षण कराने के साथ ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखना भी चुनौतीपूर्ण है।

प्रदेश सरकार ने दो अगस्त से नौवीं से 12वीं के बच्चों के लिए स्कूल खोलने के आदेश दिए हैं। शिक्षा सचिव राधिका झा की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में स्कूल खुलने के दौरान भी केवल ट्यूशन फीस लिए जाने की बात कही गई है। बसों में बच्चों को बैठाने के लिए शारीरिक दूरी का पालन करना है। पब्लिक स्कूल संचालकों ने एकराय बनाते हुए कहा है कि ऐसी स्थिति में कक्षाओं का संचालन संभव नहीं है। हालांकि ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने की बात कही गई है।

12 से 17 किमी दूर से आते हैं बच्चे

शहर के पब्लिक व कॉन्वेंट स्कूलों में हल्द्वानी के बाहरी हिस्सों से भी बच्चे पढऩे आते हैं। काठगोदाम स्थित कॉन्वेंट स्कूल में लालकुआं से तक बच्चे आते हैं। गौलापार क्षेत्र से कई बच्चे शहर पढऩे आते हैं। ऐसे बच्चों के लिए निजी संसाधनों से रोज स्कूल आना कठिन होगा।

स्कूल संचालन के लिए ये निर्देश

  • -अभिभावकों से सहमति पत्र लेना होगा
  • -केवल ट्यूशन फीस ले सकेंगे स्कूल
  • -बच्चों को स्कूल आने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा
  • -भौतिक के साथ ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प रखना होगा
  • -क्लास, स्कूल बस में शारीरिक दूरी का पालन जरूरी
  • -अधिक छात्र संख्या होने पर दो पाली में स्कूल चलेगा
  • -प्रत्येक पाली के बाद सैनिटाइजेशन करेंगे

जल्द ही बैठक कर फैसला लिया जाएगा

पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश भगत ने बताया कि केवल ट्यूशन फीस में स्कूल खोलकर कक्षाएं संचालित करना संभव नहीं है। विशेषकर ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराना। जल्द ही स्कूल प्रबंधकों के साथ बैठक कर फैसला लिया जाएगा। पब्लिक स्कूल एसोसिएशन की सचिव मणिपुष्पक जोशी का कहना है कि स्कूल बस सरेंडर हैं। वाहन शुरू कराने को टैक्स, इंश्योरेंस जमा कराना है। बिना फीस के इसे वहन करना संभव नहीं है। बच्चों के हित के लिए ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखेंगे।

Edited By: Skand Shukla