जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : कारगिल युद्ध फतह करने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर योद्धा मेजर राजेश अधिकारी ने 30 मई को 1999 को अपनी शहादत दी थी। बुधवार को जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में महावीर चक्र विजेता शहीद मेजर अधिकारी को श्रद्धांजलि देकर गौरवगाथा का वर्णन किया गया। इस दौरान वर्ष 1984 में सियाचीन ग्लेशियर पर हुए आपरेशन मेघदूत में शहीद को भी श्रद्धासुमन अर्पित कर वीरांगना व आश्रितों को सम्मानित किया गया।

जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला ने कहा कि तल्लीताल निवासी मेजर राजेश अधिकारी की शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध शुरू हुआ तो मेजर अधिकारी को पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने टास्क मिला। इस टास्क में उन्होंने वीरता साहस व निर्भीकता की जो मिसाल कायम की, इसके लिए उन्हें मरणोपरांत वीरता के दूसरे सबसे बडे़ पदक महावीर चक्र से अलंकृत किया गया।

इसके बाद आपरेशन मेघदूत के नायक शहीद दयाकिशन की वीरता के बारे में वर्णन किया गया। मेजर रौतेला ने ताया कि दयाकिशन आपरेशन मेघदूत में कुमाऊं की सबसे आगे जाने वाले दल में थे। इस दौरान नायक दयाकिशन की वीरांगना विमला देवी, पुत्र संजय जोशीव अन्य परिवार के लोगों को सम्मानित भी किया गया। वीरांगना विमला देवी ने अपने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने काफी कम में अपने पति को खो दिया था। पति खोने का उन्हें दु:ख तो है, साथ ही मातृभूमि की रक्षा के लिए शहादत देने पर गर्व भी बहुत है। कार्यक्रम में जिला पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष कर्नल बीडी कांडपाल, सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय, मेजर केएस महरा, ले. कमांडर नवीन मिश्रा आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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