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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 29, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

MBPG Collage : जब उच्च शिक्षा के लिए कारोबारी ने दान में दे दी करोड़ों की भूमि

By Skand ShuklaEdited By:
Published: Sun, 29 Nov 2020 07:08 AM (IST)

करीब 60 के दशक में कुमाऊं के प्रवेश द्वार स्थित हल्द्वानी शहर के विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए ...और पढ़ें

MBPG Collage : जब उच्च शिक्षा के लिए कारोबारी ने दान में दे दी करोड़ों की भूमि
MBPG Collage : जब उच्च शिक्षा के लिए कारोबारी ने दान में दे दी करोड़ों की भूमि

हल्द्वानी, जेएनएन : आज के दौर में बेहद कम ही लोग ऐसे जो दान पुण्य जैसे काम करना पसंद करते हैं। लेकिन एक दौर था जब लोग दान करने में जरा भी नहीं हिचकते थे। दान का मकसद केवल नाम कमाना नहीं था बल्कि समाज को बेहतर दशा और दिशा प्रदान करना था। ऐसे ही एक कारोबारी ने हल्द्वानी शहर के बीचोंबीच स्थित करोड़ों रुपये की अपनी जमीन उच्च शिक्षा की बेहतरी के लिए दान कर दी। यहां एक कालेज बनाया गया जो कि अब अपने सबसे अधिक छात्रसंख्या की वजह से कुमाऊं और राज्यभर में अपनी एक अलग पहचान रखता है।

जी हां हम बात कर रहे हैं छात्रसंख्या के लिहाज से कुमाऊं के सबसे बड़े डिग्री कालेज एमबीपीजी की। करीब 60 के दशक में कुमाऊं के प्रवेश द्वार स्थित हल्द्वानी शहर के विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए दूसरे बड़े शहरों में जाने को मजबूर होते थे। ऐसे हालातों को देखते हुए स्व. बाबू राम ने करोड़ों की भूमि दान में दे दी। वर्ष 1960 से आगरा विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त कर उस मीन पर डिग्री कालेज खुल गया और कला संकाय की पढ़ाई होने लगी।

 

मोतीराम बाबू राजकीय महाविद्यालय रखा गया नाम

बहुत ही कम लोगों को मालूम होगा जिस कालेज को आज हम एमबीपीजी कालेज के नाम से जानते हैं उसका पूरा नाम मोतीराम बाबू राजकीय महाविद्यालय है। यहां वर्ष 1963 में बीएससी की कक्षाएं शुरू हुई। इसमें मैथ्स, कैमिस्ट्री और फिजिक्स विषय शुरू हुए। जुलाई 1970 में बीएससी जीव विज्ञान व वनस्पति विज्ञान एवं एमए, एमएससी गणित की कक्षाएं भी चलने लगी। 1973 से बीएड कक्षाओं एवं 1978 से एमए अर्थशास्त्र तथा एमएससी रसायनशास्त्र की कक्षाएं शुरू हुई।

 

1982 में हुआ राजकीयकरण

मार्च 1982 में इस महाविद्यालय का राजकीयकरण हो गया। इसके बाद वर्ष 1985 में बीकॉम व एमए हिन्दी, राजनीतिशास्त्र विषय प्रारंभ हुए। स्नातक स्तर पर इतिहास व शिक्षाशास्त्र की 1987, बीए में गृहविज्ञान 1989, एमए में इतिहास, एमकॉम, भौतिक विज्ञान, प्राणी विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, अंग्रेजी, मनोविज्ञान विषय 1992-93 में शुरू हुए। वर्ष 1987 से महाविद्यालय में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय अध्ययन केन्द्र की स्थापना हुई। इसे बाद तमाम नए पाठ्यक्रम व रोजगार परक पाठ्यक्रम आरंभ हो चुके हैं।

 

प्रशासनिक व राजनीति पदों में पहुंचने वाले शख्स

एमबीपीजी कालेज से अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं ने देश-विदेश तक नाम कमाया है। उच्च प्रशासनिक पदों पर डा. एससी अग्रवाल, नवीन जोशी, राजनीति पदों पर यशपाल आर्य, महेन्द्र सिंह पाल, बहादुर पाल, मोहन तिवारी, जेएस खुराना, विदेश में डा. पंकज साह फिल्म में महेश सिंह के साथ ही कई दर्जन लोग विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में प्रोफेसर, प्राचार्य, निदेशक पद के साथ ही इंटर कालेजों में योग्य शिक्षक बनकर ऊंचाइयां हासिल की। एमएससी करने के बाद कई युवा वैज्ञानिक बने, जो आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।