जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : कैंचीधाम में बाबा नीब करौरी की भक्ति ने अमेरिकी लेखिका को नैनीताल खींच लाई, जिसके चलते वह वर्ष 2014 से ही जिले में रह रही थी। सांस की बीमारी के चलते निधन होने के बाद मोर्चरी में पोस्टमार्टम किया गया। वहीं अब जागेश्वर धाम में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसकी इच्छा वह पहले ही व्यक्त कर चुकी थीं। इसके चलते पोस्टमार्टम के बाद शव जागेश्वर धाम ले जाया गया है।

अंतिम संस्‍कार के लिए अमेरिका से पहुंची बेटी

अमेरिका लेखिका 63 वर्षीय यवेटी क्लेरी रोजर उर्फ रामरानी बाबा नीब करौरी की असीम भक्त थी। 18 वर्ष की उम्र में ही उन्हें कैंची धाम से अनुराग हो गया था। ऐसे में वह कौसानी स्थित आश्रम में बस गईं और बाबा की भक्ति की। निधन के बाद उनकी बेटी क्रिस्टीना अमेरिका से हल्द्वानी पहुंची और मां के शव को अंतिम संस्कार के लिए जागेश्वर ले गईं। यवेटी क्लेरी रोजर पत्नी फ्रेंक सिनेवाबर मूल रूप से अमेरिका के वाओस, न्यू मैक्सिको की निवासी थीं और चोरगलिया निवासी योग और ध्यान की शिक्षिका मीनाक्षी बजेठा की दोस्त थीं।

बेटी का नाम शक्ति, बेटे का रखा हनुमान

शनिवार रात जब उन्हें अस्थमा का दौरा पड़ा तो वह कौसानी स्थित आश्रम में थीं। निधन के बाद जब रामरानी का पासपोर्ट चेक किया गया तो उनके स्वजनों से संपर्क हो पाया। उनकी दोस्त मीनाक्षी ने बताया कि रामरानी की दिनचर्या पूजा-पाठ में बीतती थी और वह भारत की धरती पर मृत्यु चाहती थीं। उन्होंने बेटी का नाम शक्ति और बेटे का नाम जय हनुमान रखा है। पूरे प्रकरण की रिपोर्ट पुलिस ने विदेश मंत्रालय को भेज दी है।

चोरगलिया में चलाती थीं योगा सेंटर

चोरगलिया निवासी योग और ध्यान की शिक्षिका मीनाक्षी बजेठा ने बताया कि अमेरिका के टेक्सास की मूल निवासी यवेटी क्लेरी रोजर हिंदू संस्कृति से काफी प्रभावित थीं। वह कौसानी स्थित आश्रम में छह साल से रह रही थीं। वहीं मीनाक्षी का ननिहाल भी है। इसी कारण दोनों की नजदीकियां बढ़ गईं थीं। मीनाक्षी बजेठा ने बताया कि उनकी अंतिम इच्छा थी कि मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार जागेश्वर धाम में किया जाए। उनकी बेटी टीटी शक्ति और बेटा जय हनुमान अंतिम संस्कार के लिए पहुंच गए हैं।

18 साल की उम्र जागी थी बाबा के प्रति भक्ति

यवेटी क्लेरी रोजर बाबा नीब करौरी से काफी प्रभावित थीं। वह 18 साल की उम्र से ही कैंचीधाम आती-जाती थीं। बाबा से प्रभावित होकर उन्होंने हिंदुस्तान के इतिहास विषय पर पीएचडी की। बाबा ने उनका नाम रामरानी रखा था और हिंदुत्व के प्रचार-प्रसार का भी गुरुमंत्र दिया था। तब से ही रामरानी पूजा पाठ करने लगी थीं। उन्होंने हिंदुत्व पर किताबें भी लिखी हैं। सोशल मीडिया पर वह हिंदू संस्कृति का प्रचार करती थीं।

Edited By: Skand Shukla