नैनीताल घूमने जा रहे हैं तो भूलकर भी न मिस करें ये खूबसूरत जगह, बादलों के बीच दिखते हैं हिमालय के अद्भुत नजारे
नैनीताल के पास किलबरी-पंगोट प्रकृति प्रेमियों और पक्षी देखने वालों के लिए एक शांत गंतव्य है, जहाँ घने जंगल और हिमालय के अद्भुत नज़ारे मिलते हैं।
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HighLights
बांज, बुरांश के घने जंगल और पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियाँ।
हिमालय की चोटियों जैसे नंदा देवी के विहंगम दृश्य दिखाई देते हैं।
ट्रेकिंग, बर्ड वाचिंग और धार्मिक स्थलों का अनुभव करें।
किशोर जोशी, नैनीताल। शहरों के शोरगुल, भागदौड़ और भीड़भाड़ से दूर अगर आप प्रकृति को करीब से महसूस करना चाहते हैं तो उत्तराखंड में नैनीताल जिले के किलबरी-पंगोट आपका इंतजार कर रहा है। बांज, बुरांश और देवदार के घने जंगल, पहाड़ों पर अठखेलियां करते बादल, ठंडी हवाओं के झोंके और सैकड़ों प्रजातियों के पक्षियों की चहचहाहट यहां आने वाले पर्यटकों को एक अलग ही संसार में पहुंचा देती है।
ऐसा लगता है मानो हिमालय की गोद में सुकून के कुछ पल बिताने के लिए प्रकृति स्वयं आवाज दे रही हो।
सरोवर नगरी नैनीताल से करीब छह किलोमीटर दूर किलबरी-पंगोट मार्ग पर नयना देवी बर्ड रिजर्व क्षेत्र के प्रवेश द्वार को पार करते ही नजारा बदल जाता है। घने जंगलों के बीच से गुजरती सड़क और दोनों ओर फैली हरियाली सफर को रोमांच से भर देती है।
किलबरी-पंगोट का जंगल पक्षी प्रेमियों के लिए खास आकर्षण है। यहां प्रवासी व स्थानीय पक्षियों की करीब पांच सौ से अधिक प्रजातियां देखी जा सकती हैं। सुबह और शाम पक्षियों की चहचहाहट इस शांत वातावरण को और जीवंत बना देती है।
जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर पंगोट स्थित है। किलबरी जलाशय से आगे पंगोट का खूबसूरत इलाका शुरू होता है। देवदार, बांज और अन्य पर्वतीय प्रजातियों के वृक्षों से घिरी पहाड़ियां और मौसम के साथ बदलता रंग यहां का अलग अहसास कराता है।
कभी धूप पहाड़ों को सुनहरा कर देती है तो कभी बादलों की चादर पूरा इलाका ढक लेती है। पंगोट का शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को ठहरने के लिए मजबूर कर देता है। यहां ट्रेकिंग से लेकर बर्ड वाचिंग और प्रकृति के बीच कुछ समय बिताने तक के कई विकल्प हैं।
यहीं से कीजिए हिमालय के दर्शन
पंगोट-किलबरी मार्ग पर स्थित हिमालय दर्शन क्षेत्र पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण है। मौसम साफ हो तो यहां से ग्रेटर हिमालय व शिवालिक रेंज की बर्फीली चोटियों के विहंगम दृश्य दिखाई देते हैं। इसमें देश की दूसरी सबसे ऊंची चोटी नंदा देवी के अलावा त्रिशूल, नंदा कोट, नंदा खाट, अन्नपूर्णा, पंचाचूली आदि चोटियों का नजारा पर्यटकों की यात्रा को यादगार बना देता है।
पंगोट क्षेत्र से सूर्यास्त का दृश्य भी मनमोह लेता है। ढलता सूरज जब पहाड़ों के पीछे धीरे-धीरे ओझल होता है तो ऐसा प्रतीत होता है मानो दिनभर की यात्रा के बाद सूरज भी अपने घर लौट रहा हो।
पर्यटकों की पसंद ने बनाया नया डेस्टिनेशन
करीब 10 साल में किलबरी-पंगोट से लेकर विनायक, कुंजखड़क और च्यूरानी तक का क्षेत्र तेजी से नए पर्यटन गंतव्य के रूप में उभरा है। पर्यटकों की बढ़ती पसंद के चलते यहां होटल, रिसोर्ट और होम स्टे की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। क्षेत्र में एक सौ से अधिक होटल, रिसोर्ट और होम स्टे संचालित हो रहे हैं। यहां कैंप साइट में हट्स भी आपको मिल जाएंगे।
वैसे तो यहां साल भर आ सकते हैं, लेकिन गर्मियों के अलावा बरसात में यहां प्रकृति के बीच ठहरने का आनंद ही अलग रहता है। वन विभाग की ओर से पर्यटकों के लिए ट्रेकिंग रूट भी विकसित किए गए हैं। कई रिसोर्ट संचालकों ने भी अपने स्तर पर ट्रेकिंग रूट विकसित किए हैं। इससे क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं और यह क्षेत्र नए नेचर डेस्टिनेशन के रूप में पहचान बना रहा है।
ऐसे पहुंचें पंगोट-किलबरी
पंगोट- किलबरी पहुंचने के लिए पर्यटक पहले काठगोदाम तक रेल सेवा से पहुंच सकते हैं। काठगोदाम से पंगोट की दूरी 52 किलोमीटर है। काठगोदाम से टैक्सी या निजी वाहन से हल्द्वानी-नैनीताल हाईवे से होते हुए पंगोट पहुंचा जा सकता है। नैनीताल आने के बाद भी पंगोट के लिए टैक्सी और बाइक टैक्सी की सुविधा उपलब्ध रहती है। घुमावदार पहाड़ी सड़क, चीड़-बांज के जंगल, बादलों की आवाजाही के बीच रास्ते के नजारे मंजिल तक पहुंचने से पहले ही सफर को यादगार बना देते हैं।
ट्रेकिंग रूट पर आस्था का पथ
यहां प्रकृति के साथ आस्था का अनूठा संगम भी देखने को मिलता है। पंगोट से करीब ढाई किलोमीटर की चढ़ाई पार करने के बाद चोटी पर ब्रह्मस्थली मंदिर स्थित है, जिसे स्थानीय बोली में बधाण मंदिर भी कहा जाता है। प्रधान दिनेश बुढ़लाकोटी बताते हैं कि क्षेत्र के ग्रामीण इस मंदिर में अपनी दुधारू गाय-भैंस का दूध चढ़ाते हैं। मान्यता है कि इससे पशुधन के लिहाज से सुख-समृद्धि मिलती है।
पंगोट से करीब डेढ़ किलोमीटर के ट्रेक के बाद पौराणिक टिगनेश्वर महादेव मंदिर पहुंचा जा सकता है। वहीं घुग्घुखान से करीब डेढ़ किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई के बाद घन्याल देवी मंदिर स्थित है। प्रकृति और धार्मिक आस्था से जुड़े ये स्थल उन पर्यटकों के लिए खास आकर्षण हैं जो पर्यटन के साथ पहाड़ की संस्कृति और परंपराओं को भी करीब से जानना चाहते हैं।
