जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : जानलेवा साबित हो रहे ब्लैग फंगस के मरीजों के इलाज में हर तरह की सावधानी बरतने की जरूरत पड़ रही है। इस तरह के मरीजों को दी जाने वाली दवाइयां किडनी के लिए घातक है। डा. सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती ऐसे मरीजों की हर दूसरे दिन किडनी जांच कराई जा रही है। इस समय अस्पताल में ब्लैग फंगस के 18 मरीज भर्ती हैं।

चिकित्सा अधीक्षक डा. अरुण जोशी ने बताया कि एसटीएच में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रह है। डाक्टरों की टीम इलाज में जुटी है। दवाइयां भी उपलब्ध हैं। शुक्रवार को 18 मरीजों में एक मरीज का ऑपरेशन ईएनटी स्पेशलिस्ट ने किय। एक और मरीज का ऑपरेशन पांच जून को किया जाएगा। मरीजों के इलाज में हर तरह की सावधानी बरती जा रही है। ऐसे मरीजों में दवाइयां का दुष्प्रभाव भी अधिक देखने को मिलता है। इसलिए हर दूसरे दिन किडनी प्रोफाइल के अलावा अन्य जांचें भी करवाई जा रही हैं। वहीं, एसटीएच में इलाज के लिए दूसरे राज्यों के भी मरीज पहुंचे हैं। अभी तक दिल्ली व लखनऊ में इलाज करा रहे चार मरीजों को भर्ती किया जा चुका है।

ब्लैक फंगस को लेकर डॉक्टर अधिक सतर्कता बरत रहे हैं। उनका कहना है कि यह बहुत ही घातक बीमारी है। जरा सी लापरवाही करने से आपकी आंख की रोशनी जा सकती है या फिर आंख निकालनी पड़ सकती है। यहां तक की संक्रमण अधिक फैलने पर जान भी जा सकती है। इससे अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

मधुमेह के रोगियों में यह तेजी से फैलता है। इसलिए इम्यूनिटी कमजोर व शुगर के रोगियों को बागवानी या मिट्टी के संपर्क में होने वाले कामों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

अन्य बीमारियों के रोगियों में खतरा अधिक

डा. अरुण जोशी ने बताया कि डायबिटीज समेत अन्य बीमारियों से ग्रस्त मरीजों में ब्लैग फंगस की दवाइयां का दुष्प्रभाव सामान्य मरीजों की अपेक्षा अधिक देखने को मिलता है। डाक्टरों की टीम इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए उपचार कर रही है।

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Edited By: Prashant Mishra