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हल्द्वानी, जेएनएन : जलशक्ति अभियान के तहत बरसात के पानी को बचाने के लिए प्रशासन व जलसंस्थान ने पहल शुरू कर दी है। शुरुआत में चार सरकारी महकमों में बरसात के पानी के संग्रहण के लिए टैंक बनाए जाएंगे। इसके लिए दिल्ली की एक कंपनी से कोटेशन मांगा गया है। इसके बाद निविदा आमंत्रित कर टैंक निर्माण का काम शुरू किया जाएगा। 
जलसंस्थान के अधिशासी अभियंता विशाल कुमार ने बताया कि बरसात के लाखों लीटर पानी को बचाने के लिए प्रशासनिक अफसर भी आगे आए हैं। पहले फेज में डीएम कैंप ऑफिस, एमबी डिग्री कॉलेज, बेस हॉस्पिटल व जलसंस्थान कार्यालय में रेन वाटर स्टोरेज टैंक बनाए की योजना है। दिल्ली की एक कंपनी टैंक बनाने के लिए आने वाले खर्च का सर्वे कर लौट गई है। बेस अस्पताल व एमबी डिग्री कॉलेज में एक-एक लाख लीटर के टैंक बनाए जाएंगे। जबकि डीएम कैंप व जलसंस्थान कार्यालय में 50-50 हजार लीटर के टैंक बनेंगे। 
50 हजार लीटर के टैंक में नौ लाख रुपये व एक लाख लीटर के टैंक बनाने में 15 से 18 लाख रुपये की लागत आने का अनुमान है। दिल्ली की कंपनी के कोटेशन भेजने के बाद निविदा आमंत्रित कर टैंक निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। अगले चरण में जलसंस्थान के जगदंबा नगर नलकूप, शीशमहल स्थित वृत्त कार्यालय, काठगोदाम संग्रह केंद्र, फिल्टर हाउस व ऊंचापुल संग्रह केंद्र में भी जल संग्रहण टैंक बनाने की योजना है। पहले चरण के अनुभव के बाद अगले चरण की तैयारी की जाएगी। 

कोटाबाग में चार स्थानों पर बनाए जाएंगे चाल-खाल
अधिशासी अभियंता ने बताया कि बरसाती पानी के संरक्षण व संवर्धन के लिए कोटाबाग ब्लॉक में चाल-खाल बनाने की भी तैयारी चल रही है। स्यात के तलिया व पांडे गांव, बगड़ के बगड़ तल्ला, सिमलखेत में चार चाल-खाल बनाए जाएंगे। खास बात यह है कि चाल-खाल बनाने का मुख्य उद्देश्य इसके पास से प्राकृतिक स्रोतों को रिचार्ज करना होगा। जिससे गर्मी के मौसम में भी पानी के संकट से निपटा जा सके। 

हैंडपंपों का होगा भूजल स्तर बढ़ाने के लिए उपयोग  

जलसंस्थान के चार हैंड पंप वर्तमान में पूरी तरह से सूख चुके हैं। पंप के लिए की गई बोरिंग को भूजल रिचार्ज के लिए प्रयोग करने की भी योजना है। ईई ने बताया कि कुंवरपुर गौलापार के दानीबंगर, कोटाबाग के भरतपुर प्राइमरी स्कूल, छोटी हल्द्वानी में किशन सिंह खोलिया के घर के पास व स्यात हाईस्कूल के पास सूखे नलकूपों की बोरिंग से बरसात का पानी भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए योजना बनाई जा रही है।

Posted By: Skand Shukla

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