जागरण विमर्श: एआइ और रोबोटिक्स इंजीनियरिंग से स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियों से निपटेगा उत्तराखंड- शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स इंजीनियरिंग का उपयोग किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ...और पढ़ें

जागरण विमर्श कार्यक्रम में स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल।

समय कम है?
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गोविंद बिष्ट जागरण, हल्द्वानी। उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं की मजबूती के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और रोबोटिक्स इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकारी चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ तकनीकी प्रशिक्षण के बाद लोगों को मिलने वाली सुविधाओं का दायरा भी बढ़ेगा।
108 सेवा के रिस्पांस टाइम को कम कर अतिरिक्त राहत देने की तैयारी है। स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र में सेवा देने वाले डाक्टर अपने परिवार और बच्चों की बेहतर पढ़ाई को लेकर चिंतित रहते हैं। इनके परिवारों के लिए हल्द्वानी-देहरादून में आवासीय कालोनी का निर्माण किया जाएगा। यहां सुविधा संग सुरक्षा का जिम्मा सरकार का होगा।
शुक्रवार को जागरण विमर्श के दौरान स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने स्वास्थ्य क्षेत्र के 'मौजूदा ढांचे और संभावना' विषय पर चीफ रिपोर्टर गणेश जोशी व रिपोर्टर उदय सेठ से खुलकर संवाद किया। मेडिकल कालेज में फैकल्टी की कमी के सवाल पर मंत्री उनिया ने कहा कि इस कमी को दूर करने के लिए मंत्रालय संभालने के बाद उन्होंने पहली कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया था कि साक्षात्कार के बाद नियुक्ति की फाइल को मंत्री और सीएम के पास लाने की जरूरत नहीं होगी।
मामले के कई चरणों से गुजरने की बजाय अक्सर देरी होती है। इसलिए सचिव स्तर से ही ज्वाइनिंग को लेकर फैसला होगा। पर्वतीय क्षेत्र में सुविधाओं के विस्तार के लिए चिकित्सकों का वेतन बढ़ाने के साथ ही सरकारी परिसर में निजी प्रैक्टिस की अनुमति दी गई है। इसके अलावा ट्रांसफर पालिसी में 'पैकेज' सिस्टम तैयार किया गया है। यानी किसी एक विशेषज्ञ के अभाव में दूसरे का काम न अटके।
डिलीवरी से जुड़े मामलों में गायनोलाजिस्ट संग एनेस्थेटिक की अहम भूमिकी होती है। पैकेज में इन दोनों पदों को शामिल किया गया है। वहीं, हल्द्वानी में लंबे समय से निर्माणाधीन राज्य कैंसर संस्थान की लेटलतीफी पर मंत्री का कहना था कि सरकार गंभीरता इस पर काम कर रही है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर संचालन को लेकर वेदांता अस्पताल सहमत है। टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट से भी बात चल रही है। प्रस्ताव के परीक्षण के बाद जल्द राज्य के लोगों के हित में निर्णय लिया जाएगा।
सेवानिवृत्त चिकित्सकों की दून-हल्द्वानी में तैनाती नहीं
सेवानिवृत्ति के बाद संविदा के तहत सेवा देने वाले चिकित्सकों की पहली पसंद हल्द्वानी, देहरादून और रुद्रपुर के अस्पताल हैं। लेकिन अब मैदानी इलाकों में इन्हें नियुक्ति नहीं मिलेगी। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार महानगरों में स्वास्थ्य विभाग के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है। उपचार के लिए आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। युवा चिकित्सकों के लिए इस मशीनरी को समझना जरूरी है। ताकि अनुभव बढ़ने पर वह दूसरी जगह बेहतर सेवा दे सके।
फर्जीवाड़ा रोकने को विकसित करेंगे तंत्र
देहरादून में फर्जी प्रमाणपत्रों के माध्यम से मेडिकल कालेज में प्रवेश लेने के सवाल पर मंत्री का कहना था कि जिस समय में उनके पास सूचना पहुंची थी। वह ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे। वहीं से डीएम को फोन पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इससे पूर्व भी उत्तराखंड में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। मंत्री उनियाल के अनुसार हर मेडिकल कालेज में दस्तावेजों की जांच होगी। जल्द ऐसा तंत्र विकसित होगा। जिससे भविष्य में फर्जीवाड़े की आशंका न रहे।
ट्रामा सेंटरों पर मुहर से हादसों पर लगाम
पर्वतीय क्षेत्र में हादसों का ग्राफ बढ़ रहा है। लेकिन ट्रामा सेंटर की कमी के कारण गंभीर घायलों के लिए संकट की स्थिति पैदा हो जाती है। मंत्री के अनुसार हादसे वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर यहां ट्रामा सेंटर का निर्माण किया जाएगा। श्रीनगर, बदरीनाथ और उत्तरकाशी समेत अन्य जगहों पर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। जल्द धरातल पर प्रयास देखने को मिलेगा।
मेडिकल टूरिज्म में योग की अहम भूमिका
मेडिकल टूरिज्म को लेकर केंद्रीय स्तर से गाइडलाइन जारी होनी है। उत्तराखंड सरकार का इस पर विशेष फोकस है। योग को भी इससे जोड़ा जाएगा। इसके अलावा भवाली के टीबी अस्पताल का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य में इस क्षेत्र को लेकर अपार संभावनाएं नजर आती हैं। आगे बढ़ने में केंद्र सरकार का सहयोग अहम साबित होगा।
