जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : पुरी पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय व लोकसभा के माध्यम से एक संदेश प्रसारित हुआ कि अमुक पंथ का अधिकार तो नहीं बनता लेकिन उपहार के रूप में उन्हें जमीन दी जाए। यह किसी नेता की आवाज हो सकती है, न्यायालय की भाषा यह नहीं हो सकती।

पुरी पीठाधीश्वर ने कहा क‍ि उप्र सरकार मंदिर से 32 किमी दूर पांच एकड़ जमीन दे चुकी है। वे लोग इतने चतुर हैं कि मंदिर का स्वरूप क्या होगा, चुपचाप देखते रहे। जब मंदिर का स्वरूप सामने आ गया तब मक्का को मात देने की विधा से वे पांच एकड़ जमीन का उपयोग करेंगे। आने वाले समय में मथुरा, काशी को लेकर भी इसी निर्णय की पुनरावृत्ति होगी। फैसला वर्तमान में भले अच्छा लग रहा है, लेकिन भविष्य में उप्र में तीन पाकिस्तान बनाने की भूमिका बन गई है। योगी व मोदीजी को इस पर विचार करना चाहिए।

हल्‍द्वानी पहुंचे पुरी पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती के दर्शन के लिए शहर के प्रबुद्ध जन उमड़ पडे। बिठोरिया नंबर-एक में मनोज पाठक के आवास पर सुबह से ही भक्तों पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। भक्तों ने धर्म, राष्ट्र व आध्यात्म विषय पर जगतगुरु से सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा शांत की। जगतगुरु ने बड़ी आत्मीयता व स्पष्टता से सवालों के जवाब दिए। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा दर्शन, विज्ञान व व्यवहार में सामंजस्य साधने की विधा केवल सनातन धर्म है।

राजनीति कभी भी धर्म की सीमा से बाहर नहीं हो सकती। उन्होंने राज धर्म, शास्त्र धर्म, अर्थ नीति, दंड नीति को राजनीति का पर्याय बताया। जगतगुरु ने एक सवाल के जवाब में कहा कि देश के वर्तमान प्रधानमंत्री विज्ञान के प्रति आस्थान्वित व रक्षा को लेकर जागरूक परिलक्षित होते हैं। आदि गुरु शंकराचार्य के चरणपादुका के दर्शनों के साथ प्रसाद का वितरण किया गया। रविवार को श्री चारधाम मंदिर गुजरौड़ा में संगोष्ठी होगी।

Edited By: Skand Shukla