हल्द्वानी, [जेएनएन]: भारत और नेपाल का वन विभाग सोशल मीडिया की मदद से वन्यजीवों की निगरानी करेगा। वॉट्सएप ग्रुप बनाकर दो देशों के फॉरेस्ट अधिकारियों को जोड़ा जाएगा। जिसके बाद बार्डर पर वन्यजीव से जुड़ी हर गतिविधि और सूचना को आपस में साझा किया जाएगा। रामपुर रोड स्थित एफटीआइ परिसर के सभागार में गुरुवार को भारत-नेपाल ने आपसी सहयोग से वन्यजीव संरक्षण को मजबूती देने पर मंथन किया। 

कुमाऊं के वनाधिकारी और नेपाल के 13 फॉरेस्ट ऑफिसर बैठक में शामिल हुए। वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि नंधौर सेंचुरी नेपाल बार्डर से सटी हुई है। दो देशों की सीमा मिलने के कारण अक्सर वन्यजीवों का इधर-उधर मूवमेंट होना सामान्य बात है। वॉट्सएप ग्रुप के जरिए हम इस जानकारी को साझा कर इनके संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकते हैं। 

वहीं बार्डर क्षेत्र से होने वाली तस्करी की किसी घटना की सूचना ग्रुप में साझा कर तस्करों को पकड़ने में भी मदद मिलेगी। इंडो-नेपाल कोऑपरेट नाम से बने इस गु्रप में जंगल से जुड़ी हर जानकारी को डाला जाएगा। साथ ही बॉर्डर एरिया में होने वाले मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है। महीने में दो बार संयुक्त गश्त करेंगे खटीमा और टनकपुर से सटे बार्डर जंगल में हर 15 दिन में दोनों देश के वनाधिकारी संयुक्त गश्त करेंगे। 

बैठक में तय किया गया कि गश्त को लेकर विशेष टीम बनाई जाएगी। कोरीडोर सीमा का अध्ययन होगा टनकपुर बार्डर पर बूम के नाम से काफी पुराना कारीडोर है। वन विभाग अब दोबारा नए सिरे से इस कोरिडोर की स्टडी करेगा। हाथी मूवमेंट और वन्यजीव प्रजनन को लेकर भी इस कोरीडोर को जाना जाता है। गश्त को मॉडर्न बनाना जरूरी वन विभाग ने माना कि जंगल की सुरक्षा को लेकर इंसानी गश्त का विकल्प नहीं है। लेकिन तकनीक के दौर में आधुनिक उपकरणों का सहयोग जरूरी है। 

ड्रोन, जीपीएस का इस्तेमाल कर स्मार्ट पेट्रोलिंग कर सकते हैं। इंटेलीजेंस नेटवर्क मजबूत करेंगे नेपाल बार्डर पर अवैध आवाजाही को रोकने के लिए इंटेलीजेंस की मजबूती पर भी जोर दिया गया। एसएसबी कमांडेंट आरके त्रिपाठी ने कहा कि सूचना के आदान-प्रदान से तस्करों पर लगाम कसी जा सकती है। नंधौर सेंचुरी में देखा गश्त का तरीका बैठक के बाद नेपाल से आया 13 सदस्यों का दल नंधौर सेंचुरी पहुंचा। यहां उन्होंने गश्त का तरीका देखने के साथ वनकर्मियों से वार्ता की। 

जुलाई में नेपाल में होगी संयुक्त बैठक ज्योलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन के डॉ. हरीश गुलेरिया ने बताया कि संस्था द्वारा पिछले तीन साल से नेपाल में वन्वजीव संरक्षण प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। पांच माह पूर्व नंधौर में भी प्रोजेक्ट को शुरू किया गया। जुलाई में दूसरी संयुक्त बैठक नेपाल में करवाई जाएगी। 

बैठक में शामिल रहे मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. कपिल जोशी, डीएफओ डॉ. चंद्रशेखर सनवाल, डीएफओ डॉ. नीतिश मणि त्रिपाठी, डीएफओ कल्याणी नेगी, जेडएसएल के डॉ. हरीश गुलेरिया, नेपाल स्थित बांके नेशनल पार्क के मुख्य संरक्षक दिल बहादुर पून, मुख्य संरक्षक गोपाल घिमिरी, बद्री विनोद दहल, नेत्र राज आचार्य, पुष्कर बहादुर सिंह, प्रदीप राज जोशी, अनिल परसाई, पुष्पा पांडे आदि शामिल रहे।

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