नैनीताल, [जेएनएन]: गोमुख में भूस्खलन के बाद झील बनने के मामले में याचिकाकर्ता ने इसरो और सरकार के तथ्यों में विरोधाभास उजागर किया है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से दायर प्रति शपथपत्र पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से 16 फरवरी तक जवाब पेश करने के आदेश पारित किए हैं।

दिल्ली निवासी अजय गौतम ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि गोमुख में झील बन रही है, जिसकी लंबाई डेढ़ किलोमीटर है। इसकी पुष्टि इसरो द्वारा खींचे गए फोटोग्राफ से हुई है। इसमें झील बनने का उल्लेख है। सरकार की ओर से कोर्ट में दाखिल जवाब में कहा था कि वहां पर कोई झील नहीं है।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि सरकार इस मामले में गुमराह कर रही है। एक ओर सरकार झील नहीं होने का दावा करती है, दूसरी ओर अपने शपथ पत्र में इसरो द्वारा द्वारा लिये गए फोटोग्राफ को अपने जवाब दावे में पेश कर रही है। फोटोग्राफ में साफ नजर आ रहा है कि वहां झील बन रही है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सरकार और इसरो के तथ्यों में विरोधाभास है। 

आठ किमी सिकुड़ गया ग्लेशियर

याचिकाकर्ता के अनुसार गोमुख ग्लेशियर 30 किलोमीटर दायरे में फैला था, जो पिघलकर 22 किलोमीटर रह गया है। जुलाई 2017 में वहां भूस्खलन से गोमुख में बड़ी मात्रा में बोल्डर(बड़े पत्थर) व मलबा जमा हो गया है, जिससे झील बनने के आसार बन गए हैं और केदारनाथ जैसी आपदा आने की आशंका को बल मिल रहा है। इसकी चेतावनी केंद्र व राज्य की नौ एजेंसियां सरकार को दे रही हैं, परन्तु सरकार द्वारा अब तक कार्रवाई नहीं की जा रही है।

याचिकाकर्ता ने झील को वहां से वैज्ञानिक तरीके से हटाने का आग्रह किया है ताकि भविष्य में होने वाली आपदाओं को रोका जा सके। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ ने बुधवार को मामले को सुनने के बाद सरकार को याचिकाकर्ता के प्रति शपथ पत्र पर 16 फरवरी तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

यह भी पढ़ें: किच्छा के 541 अतिक्रमणकारियों से हार्इकोर्ट ने दो हफ्ते में मांगा जवाब

यह भी पढ़ें: हाई कोर्ट ने बर्खास्त प्राध्यापक को बहाल करने के दिए आदेश

Posted By: Raksha Panthari

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस