नैनीताल, [जेएनएन]: गंगा और यमुना नदी की निर्मलता को लेकर उठ रहे सवालों पर नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड समेत पांच राज्योंं को नोटिस जारी किए हैं। सभी को 30 सितंबर तक अपना जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।

दिल्ली में विश्वासनगर, शाहदरा निवासी अजय गौतम ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इस संबंध में पत्र भेजा था। इसमें कहा कि गंगा को हिन्दू के साथ ही दूसरे धर्मों में सम्मान दिया जाता है। धार्मिक कर्मकांड के साथ ही अंतिम संस्कार भी गंगा किनारे किए जाते हैं। गंगोत्री से गंगासागर तक गंगा में प्रदूषण की मात्रा लगातार बढ़ रही है। वैज्ञानिक अध्ययन का हवाला देते हुए पत्र में कहा गया कि औद्योगिक कचरे व धार्मिक कर्मकांड की प्रक्रिया के दौरान प्रयुक्त सामग्री भी नदी में बहाई जाती है, जिससे गंगा का पानी आचमन के योग्य भी नहीं रह गया है। यमुना नदी की स्थिति अच्छी नहीं है। पत्र में गंगा व यमुना दोनों नदियों की अविरलता व जल की गुणवत्ता के लिए केंद्र व राज्य सरकारों को दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है। 

हाईकोर्ट ने उनके इस पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए इस पर संज्ञान लिया। वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके बिष्ट व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए पांच राज्यों उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है। 

गंगा की सफाई को कोट पहले भी कर चुका आदेश

उल्लेखनीय है कि गंगा की निर्मलता को लेकर पहले से ही सख्त रुख दिखाता रहा है। हाल ही में हाईकोर्ट ने हरिद्वार में गंगा के घाटों की सफाई और सीसीटीवी कैमरों से इसकी निगरानी करने के आदेश पारित किए थे। इसके लिए बाकायदा दो कोर्ट कमिश्नरों की नियुक्ति की गई है। मंगलवार को भी एक जनहित याचिका पर फैसला देते हुए हरिद्वार में गंगा किनारे घाटों की हर तीन घंटे में सफाई करने तथा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के निर्देश दिए थे। इसके लिए डीएम हरिद्वार को नोडल अधिकारी बनाया गया है। 

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Posted By: Raksha Panthari