नैनीताल, [जेएनएन]: राज्य की जेलों में कैदियों की स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका का कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने जेलों में कैदियों की बुरी दशा, पुलिस अभिरक्षा में अप्राकृतिक मौत, जेलों में स्टाफ की कमी और अप्रशिक्षित स्टाफ के मामले में सरकार से स्थिति साफ करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई दो जनवरी नियत की गई है। कोर्ट ने पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के इस संबंध मे जारी दिशा निर्देशों के दृष्टिगत अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। 

इन दी मैटर ऑफ इन ह्यूमन कंडीशन ऑफ इन 1382 प्रिजन का सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा चार बिंदुओं पर दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। सर्वोच्च न्यायालय ने देश के उच्च न्यायालयों से इस मामले का स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका दायर करने की अपेक्षा की थी। 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में हाई कोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की गई। वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके बिष्ट व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद सरकार से पूछा है कि जेलों में कैदियों की स्थिति सुधारने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

सीएससी परेश त्रिपाठी ने खंडपीठ को बताया कि जेलों की स्थिति को लेकर हाई कोर्ट में पहले से पीआइएल विचाराधीन है। वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की अध्यक्षता में बनी कमेटी की ओर से राज्य सरकार को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कहा कि 17 साल के उत्तराखंड में पुलिस अभिरक्षा में मौत के आंकड़े नहीं हैं, जो हैं भी वह अब तक साबित नहीं हुए हैं। सितारगंज में पहले से खुली जेल है। कैदियों का प्रॉपर ट्रीटमेंट किया जा रहा है। 

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Posted By: Raksha Panthari

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