जागरण संवाददाता, नैनीताल : उच्च न्यायालय ने 2013 में आपदा के दौरान केदारनाथ में बही आदि गुरू शंकराचार्य की समाधि एक साल के भीतर पुन:स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही याचिकाकर्ता से कहा है कि अगर पुनर्निमाण एक वर्ष के भीतर नहीं होता है, तो वह फिर से कोर्ट में प्रार्थना पत्र दे सकते हैं।

गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह चौहान व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ में दिल्ली निवासी अजय गौतम की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से शपथपत्र पेश कर कोर्ट से एक वर्ष का समय मांगा गया। शपथपत्र में कहा गया है कि शंकराचार्य की समाधि को भव्य बनाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है। कोरोना महामारी की वजह से यह प्रोजेक्ट समय पर नहीं बन पाया। इसलिए सरकार को एक वर्ष का समय दिया जाय। कोर्ट ने सरकार के तर्क से सहमत होकर एक वर्ष का समय देते हुए याचिका निस्तारित कर दी।

पिछली सुनवाई में अवमानना की दी थी चेतावनी

जनहित याचिका में दिल्ली निवासी अजय ने कहा है कि उच्च न्यायालय ने 10 अक्टूबर 2018 को मामले में सुनवाई करते हुए एक वर्ष में समाधि को पुन: स्थापित करने के आदेश दिए थे। अभी तक अमल न होना उच्च न्यायलय के आदेश की अवहेलना है। जिस पर कोर्ट ने सरकार को अवमानना की चेतावनी देते हुए जवाब मांगा था। याचिकाकर्ता का कहना है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने चार पीठों की स्थापना की। जिसमें से एक बद्रीनाथ पीठ है। शंकराचार्य ने ही देवभूमि का पूरे विश्व में प्रचार किया उसके बाद भी सरकार उनकी समाधि की स्थापना को लेकर सरकार लापरवाही बरत रही है। 

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