जागरण संवाददाता, नैनीताल : हाई कोर्ट ने देहरादून में अतिक्रमण हटाने को लेकर जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता को जान से मारने की धमकी देने के मामले में बुधवार को सुनवाई की। कोर्ट ने एसएसपी देहरादून को याचिकाकर्ता की संपत्ति व स्वजनों को सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिए। अगली सुनवाई के लिए चार सप्ताह बाद की तिथि नियत कर दी गई है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक वर्मा की खंडपीठ में देहरादून निवासी आकाश यादव की जनहित याचिका पर सुनवाई की। पूर्व में भी कोर्ट ने एसएसपी देहरादून को सुरक्षा मुहैया करने का आदेश जारी किया था। लेकिन इसी बीच उसकी सुरक्षा हटा ली गई। इसपर अतिक्रमणकारियों ने उसके और परिवार के साथ मारपीट की। बुधवार को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को मामले की जानकारी दी।

असल में आकाश ने जनहित याचिका दायर किया है कि वर्ष 2018 में कोर्ट ने देहरादून निवासी मनमोहन लखेड़ा की पीआइएल पर देहरादून की सड़कों, गलियों, नालियों व रिस्पना नदी से अतिक्रमण हटाने के आदेश पारित किए थे। इसके बाद प्रशासन की ओर से घंटाघर सहित अनेक स्थानों से अतिक्रमण हटवाया गया। लेकिन लापरवाही के कारण फिर से कुछ जगहों पर अतिक्रमण हो गया है।

जसपुर में गल्ले की दुकान में राशन कार्डों के फर्जीवाड़े में हुई सुनवाई

हाई कोर्ट ने ऊधम सिंह नगर जिले के जसपुर तहसील क्षेत्र के मनोररथपुर में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान में गड़बड़ी के मामले में बुधवार को सुनवाई की। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि आदेश के बाद भी अभी तक गड़बड़ी के लिए जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गयी है, इसकी रिपोर्ट कोर्ट में 27 अक्टूबर से पहले पेश की जाए। मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में जसपुर निवासी सरदार खान की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान विक्रेता की ओर से कहा गया कि उसकी ओर से राशन कार्डों में कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया गया। उसके पास जो भी राशन कार्ड धारक आये, उनको राशन दिया। इधर प्रशासन ने बिना उसका पक्ष सुने दुकान बंद करा दी है। जनहित याचिका में कहा गया था कि जसपुर तहसील के मनोरथपुर में सरकारी सस्ते गल्ले के दुकानदार ने 2008 से 2019 तक 191 फर्जी राशन कार्ड बनवाकर राशन का घोटाला किया। ऐसे में जिन लोगों के राशन कार्ड सही थे, उनको राशन नहीं दिया जा रहा है। इसकी शिकायत प्रशासन से की गई तो जांच में 191 राशन कार्ड फर्जी पाए गए।

Edited By: Skand Shukla