नैनीताल, जेएनएन : हाई कोर्ट ने उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को निगम कर्मचारियों का 69 करोड़ बकाया  जारी करने को कहा है। इसके लिए दिवाली से पहले सचिव वित्त व परिवहन को शासनादेश जारी करवाने को कहा गया है। परिवहन निगम का साफ तौर पर कहना है कि निगम एक व्यावसायिक संस्था है, अगर सरकार इसे फ्री में चलाना चाहती है तो उसकी भरपाई सरकार ही करेगी, अन्यथा निगम घाटे में चला जाएगा।

मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिंह की खंडपीठ में रोडवेज कर्मचारी यूनियन की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सचिव की ओर से कहा गया कि 16 अक्टूबर को सरकार को जानकारी दे दी थी कि सरकार के पास निगम का 69 करोड़ बकाया है। यूनियन के अधिवक्ता ने बताया कि मेरे बुजुर्ग मेरे तीर्थ, रक्षा बंधन, चुनाव ड्यूटी, दिव्यांग, सीनियर सिटीजन व आपदा के समय जो निगम की बसों को फ्री सेवा के लिए सरकार द्वारा लगाया जाता है, उसका किराया राज्य सरकार को देना होता है मगर सरकार द्वारा नहीं दिया गया। जबकि इस संबंध में सरकार द्वारा शासनादेश भी जारी किया गया था। सरकार ने मात्र 85 करोड़ में से 19 करोड़ ही निगम को दिया, शेष 69 करोड़ बकाया है। निगम की ओर से यह भी कहा गया कि निगम एक व्यावसायिक संस्था है, यदि सरकार इसे फ्री में चलाना चाहती है तो तो उसका भुगतान भी सरकार करे, अन्यथा निगम घाटे में चला जाएगा। रोडवेज कर्मचारियों ने जनहित याचिका में कहा था कि सरकार व निगम द्वारा उन्हें ना तो नियमित किया जा रहा है, न ही नियमित रूप से वेतन दिया जा रहा है। रिटायर कर्मचारियों के देयकों का भुगतान भी नहीं किया गया। इसके बाद भी आंदोलन की चेतावनी दी तो सरकार द्वारा एस्मा लगाने की धमकी दी जा रही है। अस्थायी कर्मचारियों को न नियमित किया जा रहा है, न पिछले चाल साल के ओवरटाइम का भुगतान किया जा रहा है। सरकार ने निगम का 85 करोड़ बकाया देना है जबकि उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को भी आठ सौ करोड़ देना है।

Posted By: Skand Shukla

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