नैनीताल, [जेएनएन]: हाई कोर्ट ने प्रदेश में निकायों के परिसीमन मामले में सरकार को बड़ा झटका देते हुए सीमा विस्तार से संबंधित सभी अधिसूचनाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा है कि परिसीमन की अधिसूचना जारी करने का अधिकार राज्यपाल को है, न कि सरकार को। परिसीमन की कार्रवाई लोगों पर थोपी नहीं जा सकती। कोर्ट के फैसले के बाद निकाय चुनावों को लेकर असमंजस बढ़ गया है। इधर, राज्य सरकार एकलपीठ के इस फैसले के खिलाफ विशेष अपील दायर करने की तैयारी में है।

पांच अप्रैल को सरकार ने प्रदेश के 41 नगर निकायों (आठ नगर निगम, 22 नगर पालिका और 11 नगर पंचायत) के परिसीमन की अधिसूचना जारी की थी। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि संविधान के तहत परिसीमन संबंधी अधिसूचना जारी करने का अधिकार राज्यपाल को है। लेकिन सरकार ने राज्यपाल की मंजूरी या संस्तुति के बिना परिसीमन संबंधी अधिसूचना जारी कर दी।

परिसीमन की कार्रवाई स्थानीय गांवों की सामाजिक स्थिति, आबादी, सांख्यिकीय व भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर की जाती है, मगर सरकार ने इस प्रक्रिया में उक्त तथ्यों को नजरअंदाज किया गया। इस संबंध में कोटद्वार के मवाकोट समेत 35 अन्य ग्राम प्रधानों ने याचिकाएं दायर की थीं। न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने पिछले दिनों सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अपराह्न दो बजे फैसला सुनाते हुए परिसीमन की अधिसूचनाओं को खारिज कर दिया।

आयोग की याचिका पर सुनवाई 22 को

एकलपीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग की सरकार को चुनाव कराने के निर्देश देने की मांग करती हुई याचिका पर भी सुनवाई की। आयोग के अधिवक्ता संजय भट्ट ने अदालत से कहा कि अब जब परिसीमन की अधिसूचना रद हो गई है तो अदालत सुप्रीम कोर्ट के किशन सिंह तोमर बनाम सुप्रीम कोर्ट से संबंधित मामले में दिए गए फैसले के अनुसार चुनाव कराने की अनुमति प्रदान करे। कोर्ट ने इस पर सरकार का रुख जानना चाहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 22 मई नियत की गई है।

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि निकायों के सीमा विस्तार को लेकर दिए गए एकल पीठ के फैसले के खिलाफ सरकार जल्द विशेष अपील दायर करेगी।

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