रमेश चंद्रा, नैनीताल : तीन दिनों तक हुई भारी बारिश ने हर किसी को हैरान और परेशान कर दिया है। यह भीषण रूप शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के साथ अरब सागर से उठे तूफान के कारण रहा। इसका असर देश के अधिकांश हिस्सों के साथ मध्य हिमालय तक दिखा। इसे लेकर पर्यावरण विज्ञानियों ने चेतावनी भी दी है कि यह बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग का परिणाम है, जो भविष्य में इस तरह की तबाही लाता रहेगा। ग्लोबल वार्मिंग के कारण ही इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में पांच से सात डिग्री बढ़ोत्तरी की आशंका है। जिससे भीषण बारिश, बर्फबारी, सूखा तो कहीं जबरदस्त बाढ़ जैसी आपदा देखने को मिलेगी।

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल के वरिष्ठ पर्यावरण विज्ञानी डा. नरेंद्र सिंह ने बताया कि अरब सागर में चक्रवात बनने के साथ ही शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ उठ गया। इन दोनों के मिल जाने से हालात बेकाबू हो गए। अब मौसम चक्र भी पहले जैसा नहीं रहा। ग्लोबल वार्मिंग के कारण जलवायु परिवर्तन में तेजी आने लगी है। यही कारण है कि अक्टूबर में ऐसा मौसम पहली बार देखने को मिला। भविष्य में इससे भी विकराल मौसम की आशंका से इन्कार नहींकिया जा सकता। जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून भी आगे खिसक गया है।

2019 के बाद इस बार भी 15 दिन देरी से मानसून विदा हुआ। डा.नरेंद्र सिंह ने बताया कि वर्तमान में वैश्विक ताप करीब दो डिग्री बढ़ गया है। सदी के अंत तक तापमान में पांच से सात डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि हो सकती है। जब दो डिग्री ताप के बढऩे से मौसम के हालात इतने बेकाबू होने लगे हैं तो तब स्थिति क्या होगी अंदाजा लगाया भी नहीं जा सकता है। वायु प्रदूषण फैलाने वाले गैसों का उत्सर्जन अभी से रोक भी दिया जाए, तब जाकर अगले सौ साल तक मौसम में सुधार की उम्मीद बन सकती है।

Edited By: Skand Shukla