हल्द्वानी, जागरण संवाददाता : शनिवार यानी 12 जून को दिल्ली में प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने पूर्व सीएम हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह व नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश संग अहम बैठक कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की। तय हुआ कि पूरे प्रदेश में परिवर्तन यात्रा निकाल लोगों तक सत्ता की कमियां पहुंचाई जाएगी। यात्रा का दारोमदार हरदा, प्रीतम और इंदिरा यानी तिकड़ी पर था। लेकिन दुर्भाग्य रहा कि अगली सुबह नेता प्रतिपक्ष का निधन हो गया।

सोमवार को हरीश रावत व प्रीतम सिंह शव वाहन पर सवार होकर स्वराज आश्रम से घाट तक नेता प्रतिपक्ष को अनंत यात्रा तक छोडऩे पहुंचे थे। रास्ते में बेटे सुमित लोगों द्वारा अंतिम दर्शन के लिए वाहन रुकवाने पर हाथ जोड़ते दिखे। मगर हरीश व प्रीतम शांत थे। हालांकि, चेहरे पर साथी और पार्टी के मजबूत स्तंभ को खोने का गम साफ झलक रहा था। पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल भी साथ में थे।

2017 में कांग्रेस को सत्ता से बाहर होने के साथ सिर्फ 11 सीटों पर सिमटना पड़ा था। इसके बाद कई बार पार्टी में गुटबाजी देखने को मिली। इसलिए भाजपा को भी हमलावर होने का मौका मिलता रहा। वहीं, प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव इस गुटबाजी को दूर करने में लगातार जुटे थे। दून के बाद दिल्ली में भी बैठक हुई। जिसके बाद तय हुआ कि सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। और हरदा, प्रीतम और इंदिरा इसकी कमान संभालेंगी। क्योंकि, इन तीनों के एकजुट हुए बिना वापसी की संभावनाओं पर सवाल खड़े होते।

शनिवार को दिल्ली में हुई बैठक में इस बात को मानने के साथ रणनीति भी तैयार की गई। लेकिन रविवार सुबह दिल का दौरा पडऩे से नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश का निधन हो गया। वहीं, प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने बताया कि उस बैठक में भी डा. इंदिरा को प्रदेश और चुनाव की चिंता थी। किस तरह कार्यक्रम होंगे। किन मुद्दों को आगे बढ़ाया जाएगा वह इन चर्चाओं में ही व्यस्त थीं।

अध्यक्ष कांग्रेस प्रीतम सिंह ने बताया कि डा. इंदिरा का लोहा पक्ष और विपक्ष दोनों मानते थे। विकट परिस्थितियों में वह मेरा साहस थी। उनसे मुझे लडऩे की क्षमता मिलती थी। उत्तराखंड के लिए यह बहुत बड़ी क्षति है।

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Edited By: Skand Shukla