हल्द्वानी, जेएनएन : स्वच्छता को लेकर नगर निगम प्रशासन कितना संजीदा है, विभाग की कार्यशैली से इसका पता चल रहा है। सफाई वाहनों की खरीद के लिए लोन के रूप में मिली 5.5 करोड़ रुपये की धनराशि 25 जनवरी से नगर निगम के खाते में डंप पड़ी है। लोन की शर्तों के मुताबिक तीन माह के भीतर वाहनों की खरीद के साथ किस्त की अदायगी शुरू होनी थी। महकमा अभी तक वाहनों की खरीद नहीं कर पाया है।

 

हल्द्वानी नगर निगम ने नए वार्डों के लिए वाहन खरीद को नेशनल सफाई कर्मचारी फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनएसकेएफडीसी) से 5.50 करोड़ रुपये का सशर्त लोन लिया है। एनएसकेएफडीसी की शर्तों के मुताबिक निगम को तीन माह के भीतर वाहन की खरीद करते हुए चौथे महीने से किस्त की अदायगी शुरू करनी थी। निगम अभी तक वाहनों की खरीद तक नहीं कर पाया है। शर्तों में स्पष्ट उल्लेख है कि वाहन खरीद में देरी होने पर लोन को वापस लिया जा सकता है। चार फीसद ब्याज पर प्राप्त लोन के लिए निगम को 5.57 लाख रुपये प्रतिमाह किस्त चुकानी है। देरी होने पर किस्त की रमक बढ़ेगी।

 

लाकडाउन को बताया था देरी की वजह

सफाई वाहनों की खरीद के लिए पार्षद लगातार दबाव बनाए हैं। पूर्व में निगम प्रशासन बीएस-6 वाहन बाजार में नहीं होने को देरी की वजह बता रहा है। बाद में लाकडाउन टेंडर की देरी की वजह बताया गया। बावजूद इसके वाहनों की खरीद की फाइल आगे नहीं बढ़ी है।

 

सफाई कर्मचारियों की भी नहीं हुई नियुक्ति

आधे शहर को दो साल बाद भी सफाई कर्मचारियों का इंतजार है। निकाय चुनाव के डेढ़ साल बाद भी 27 वार्डों को सफाई कर्मचारी नहीं मिल पाए हैं। वार्डवासी व पार्षद इसकी आवाज उठाते हैं, लेकिन बजट के अभाव में निगम अभी तक नियुक्ति नहीं कर पाया है।

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