जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : राजकीय मेडिकल कॉलेज की वायरोलॉजी लैब में अब मिजिल्स व रूबेला की जांच भी होने लगी है। इसमें उत्तराखंड के अलावा पश्चिमी उत्तर के प्रदेश से भी सैंपल आएंगे। एक अगस्त से लैब में पश्चिम उत्तर प्रदेश से रूबेला व मीजल्स के 34 सैंपल आ चुके हैं।

देशभर के नौ लैबों में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद  (आइसीएमआर) ने उत्तराखंड में राजकीय मेडिकल कॉलेज की वायरोलॉजी लैब को मीजल्स-रुबेला जांच की अनुमति दी थी। मेडिकल कॉलेज के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। इस लैब में एक अगस्त से जांच भी शुरू हो गई है। मिजिल्स व रूबेला के संदिग्ध मामलों के सैंपल विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम को लाना है। यही टीम क्षेत्र में सर्विंलांस करेगी।

फिलहाल उत्तराखंड से एक भी सैंपल नहीं आया है। इस लैब में पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भी शामिल किया गया है। अब तक उस क्षेत्र से 34 मामले सामने आ चुके हैं। वायरोलॉजी लैब की चीफ एनालिस्ट डा. विनीता रावत का कहना है कि जांचें शुरू करवा दी गई हैं। प्राचार्य प्रो. अरुण जोशी ने बताया कि इस लैब में जांच प्रक्रिया शुरू होना राज्य के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। निश्चित तौर पर इस लैब के शुरू होने से मिजिल्स व रूबेला की समय पर जांच संभव हो सकेगी।

मीजल्स को सामान्य भाषा में खसरा कहते हैं। इसके वायरस से लाल चकत्ते, खांसी, नाक का बहना, आंखों में जलन और तेज बुखार आता है। साथ ही कानों में संक्रमण, निमोनिया, बच्चों को झटका आना, घूरती आंखे, दिमाग को नुकसान और अंत में मौत तक हो जाती है। रूबेला 
इसमें महिलाओं में आर्थराइटिस और हल्का बुखार, गर्भावस्था में गर्भपात का खतरा, बच्चों में जन्मजात दोष जैसे सिर का बड़ा होना सहित अन्य शामिल है।

 

वैक्सीन है इसका इलाज
यह बहुत ही गंभीर और जानलेवा बीमारी होती है। पर इसकी रोकथाम टीकाकरण के जरिए पूरी तरह से संभव है। यह वैक्सीन बच्चों को तीन बीमारियों खसरा, गलगंड और रूबेला रोग से बचाता है।

 

Edited By: Prashant Mishra