हल्द्वानी : 'कैसे हो आप...देवभूमि दिव्यभूमि है। यहां के पहाड़, पेड़, दरिया, नदियां सब एक ही ओर इशारा करती हैं, जो सत्य है शिव है। आंखें हों तो हम उन्हें सब जगह देख सकते हैं, लेकिन जो आंखें हमारे पास हैं वह तो धुंधली हो गई हैं। इससे बाहर आना ही आध्यात्मिकता है।Ó आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर पहली बार हल्द्वानी में लोगों से रूबरू हुए तो लोगों की सहजता, सरलता को देखकर कुछ इसी तरह अभिभूत नजर आए। उन्होंने कुमाऊं की मिट्टी की जमकर तारीफ की और सकारात्मक विचारों से जीवन को खुशहाल बनाने का मंत्र दिया। कहा, 'जहां सबसे अधिक लोग खुश हों, अपने नगर हल्द्वानी को ऐसा बना दो। जहां हर हाथ के पास काम हो और हर व्यक्ति खुशहाल हो।

शुक्रवार को एमबी इंटर कॉलेज ग्राउंड में शाम 5:30 बजे श्रीश्री मंच पर पहुंचे और हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि यहां कि मिट्टी व हवा अद्भुत है। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी ऐसा नगर बने, जहां सबसे अधिक लोग खुश हों, कोई बेरोजगार न हो। उन्होंने स्वच्छता रैंकिंग में इंदौर का जिक्र करते हुए कहा कि हल्द्वानी में भी स्वच्छता हो, कुशलता हो, जो हमें एक बेहतरीन समाज देगा।सिर्फ मंदिर में बैठकर जाप करना अध्यात्म नहीं है, जिससे जीवन में चित की प्रसन्नता हो और व्यवहार में कुशलता हो ऐसा अध्यात्म का प्रभाव होता है। श्रीश्री ने लोगों से सवाल किया कि वह अपने भीतर झांकें और खुद से सवाल करें कि क्या वह वास्तव में सरल, सहज हैं? इसी से तो जीवन में रस आता है। उन्होंने कहा कि जीवन में रस की मांग सबको है, लेकिन रस है कहां? जहां रस खोजते हैं, वहां मिलता ही नहीं है।

हमारा जीवन नीरस बन गया है, इस नीरसता को छोडऩा है तो गान, ज्ञान और ध्यान को अपनाना होगा। नीरसता भाग जाएगी। जीवन सहज है, सरल है, लेकिन हमने इसे जटिल बना दिया है। सत्संग से पूर्व नगर निगम के मेयर डॉ. जोगेंद्र पाल सिंह रौतेला, पाल ग्रुप के चेयरमैन रमेश पाल व आर्ट ऑफ लिविंग उत्तराखंड एपैक्स बॉडी के सदस्य धीरेंद्र कबड़वाल, आरएस कालाकोटी, कमल कपूर, वंदना तिवारी ने श्रीश्री को लाल रंग की पगड़ी व शेरवानी भेंट कर उनका स्वागत किया।

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