हल्द्वानी का हाई प्रोफाइल एसिड अटैक कांड: मां-बेटे की सजा बरकरार, 5 लड़कियों-एक बच्चे समेत 19 लोग हुए थे घायल
हाई कोर्ट ने हल्द्वानी के 12 साल पुराने एसिड अटैक मामले में मां-बेटे सहित दोषियों की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है।

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जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने 12 साल पहले हल्द्वानी के इंदिरा नगर में आपसी रंजिश के चलते हुए चर्चित एसिड अटैक मामले में अहम निर्णय सुनाया है।
कोर्ट ने विचारण अदालत के फैसले को पूरी तरह सही ठहराते हुए दोषी मां बेटे व अन्य की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। स्पष्ट किया कि अभियुक्तों का यह कृत्य जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है, इसलिए सजा में रियायत या माफी की कोई गुंजाइश नहीं बनती है।
माफी की कोई गुंजाइश नहीं
न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने यह अहम निर्णय दिया है। अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2014 में पड़ोस में रहने वाले इरशाद और उनके परिवार के साथ हुए आपसी विवाद के बाद मोहम्मद जैकी, उसकी मां रहमत जहां और एक नाबालिग ने गुस्से में आकर दुकान से लाकर तेजाब से भरी बोतलें फेंक दी थीं।
इस भयानक हमले में कुल 19 लोग प्रभावित हुए थे, जिनमें पांच लड़कियां और एक 18 माह का मासूम बच्चा भी शामिल था। चिकित्सीय जांच में दो डाक्टरों ने पुष्टि की थी कि हमले में घायल हुए पांच लोगों के घाव और निशान जीवनभर ठीक नहीं हो सकते।
सत्र परीक्षण के दौरान पेश किए गए 14 गवाहों और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल अदालत ने वर्ष 2018 में तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। दोषियों ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि वे लगभग 12 सालों से जेल में हैं, अपनी सजा काट चुके हैं, इसलिए उन्हें रिहा किया जाए।
हालांकि, पीड़ितों के वकील दीप जोशी ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि एक मासूम बच्चे समेत कई लोगों की जिंदगी बर्बाद करने वाले दोषियों की सजा माफ नहीं की जा सकती। हाई कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए दोषियों की अपील खारिज कर दी।
