जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : Haidakhan Road Block : कोटाबाग क्षेत्र निवासी राहुल की शादी पसोली गांव की एक युवती संग हो गई। विवाह को लेकर दोनों पक्ष लंबे समय से तैयारियों में जुटे थे, लेकिन 15 नवंबर को हैड़ाखान रोड भूस्खलन की जद में आ गई।

380 मीटर लंबी सड़क से वाहन निकलना असंभव है। पैदल सफर भी जोखिम भरा है। क्योंकि अब भी पहाड़ी से भूस्खलन की पूरी आशंका है। इसलिए लोनिवि ने पहले पैदल के लिए भी रास्ता बंद किया था, लेकिन बाद में विधायक के कहने पर खोल दिया गया।

खतरे को पार कर दुल्हन के घर तक पहुंचे

वहीं, दूल्हे राहुल संग बारात में आए रिश्तेदार और दोस्त भी इसी खतरे को पार कर दुल्हन के घर तक पहुंचे। पिछले 23 दिन से इस सड़क से जुड़े ग्रामीण इस संकट से गुजर रहे हैं।

हैड़ाखान रोड बंद होने की वजह से ग्रामीण जरूरत का सामना कंधों पर लाद रोजाना पैदल सफर करने को मजबूर हैं। सड़क के दूसरे छोर पर चलने वाले वाहन डीजल भरने भी काठगोदाम तक नहीं आ सकते।

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ऐसे में ग्रामीणों को खाली गेलन पकड़ दो टेंपो पकड़ने के बाद डीजल लाना पड़ रहा है। ऐसे में यहां ईंधन भी महंगा पड़ रहा है। रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ चुके हैं।

वहीं, मंगलवार को कोटाबाग से आई बारात भी परेशानियों के बीच से होकर पसोली गांव पहुंच सकी। विवाह संपन्न होने के बाद शाम को बारात फिर इसी से रास्ते विदा हुई। गनीमत रही कि इस दौरान मलबा सड़क पर नहीं आया।

पढ़ाई के लिए कालेज पहुंचना चुनौती

पसौली, रौशिल समेत हैड़ाखान तक की छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा के लिए एमबी डिग्री कालेज और महिला डिग्री कालेज में पढ़ते हैं। पहले गांव की गाड़ी में सफर कर काठगोदाम तक पहुंचते थे। उसके बाद टेंपो से कालेज। लेकिन 15 नवंबर के बाद से इन्हें चुनौती का सामना करना पड़ता है।

बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को लेकर डर ज्यादाजमरानी संघर्ष समिति अध्यक्ष नवीन पलड़िया और सदस्य हरेंद्र सिंह ने बताया कि युवा किसी तरह खतरनाक रास्ते को पार कर और पहाड़ी के रास्ते हल्द्वानी तक पहुंच रहे हैं, लेकिन गांव के बुजुर्गों की तबीयत बिगडऩे और आपात स्थिति में गर्भवती को अस्पताल लाने पर दिक्कत बढ़ सकती है। वैकल्पिक मार्ग की स्थिति ज्यादा ठीक नहीं है। इसलिए जल्द मुख्य मार्ग को दुरुस्त किया जाना चाहिए।

गिनती शुरू, सड़क के पेड़ हटाने के आदेश

वन विभाग और लोनिवि ने मंगलवार को वनभूमि क्षेत्र से सड़क निकालने को लेकर पेड़ों की गिनती का काम शुरू कर दिया। 150 से अधिक पेड़ों की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, वनभूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने में अभी काफी वक्त लगेगा। वहीं, क्षतिग्रस्त सड़क के किनारे पर भी कुछ पेड़ खतरे की वजह बन सकते हैं। इन्हें हटाने के आदेश जारी हो चुके हैं।

Edited By: Nirmala Bohra

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